हाईकोर्ट में प्रशासनिक फेरबदल के बीच जलजनित बीमारियों पर सख्त रुख, सरकार से मांगी नई SOP
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट से मंगलवार को दो महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आईं। एक ओर केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी को उत्तराखंड हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की।
वहीं दूसरी ओर ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली जलजनित बीमारियों के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे प्रदेश के लिए नई एसओपी (SOP) तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए हैं।
भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी 9 अक्टूबर 2026 से उत्तराखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता 8 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके बाद यह नियुक्ति प्रभावी होगी। केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन ने 6 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की।
वहीं, हाईकोर्ट में वर्तमान अतिरिक्त न्यायाधीश जस्टिस सुभाष उपाध्याय के स्थायी न्यायाधीश बनने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ गई है। कॉलेजियम की मंजूरी मिलने के बाद उनकी नियुक्ति की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के सल्ट निवासी जस्टिस उपाध्याय ने वर्ष 1998 में वकालत शुरू की थी और 30 मई 2025 को उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने थे।
इसी बीच नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से फैली जलजनित बीमारियों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए।
सुनवाई के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जल संस्थान के महाप्रबंधक और पेयजल निगम के मुख्य अभियंता अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
हाईकोर्ट ने कहा कि अशुद्ध पानी पीने से लोगों के बीमार होने के पीछे संबंधित विभागों की लापरवाही जिम्मेदार है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि समय-समय पर पानी की टंकियों की सफाई और निगरानी की जाती, तो हालात इतने गंभीर नहीं होते।
कोर्ट ने सरकार को जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए नई एसओपी तैयार कर पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चार सप्ताह के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है।
गौरतलब है कि ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्रों में दूषित पानी के कारण पिछले कुछ महीनों में 250 से अधिक लोग पीलिया, टायफाइड और डायरिया जैसी बीमारियों की चपेट में आए थे।
एक छात्र और एक महिला की मौत के बाद यह मामला गंभीर रूप से चर्चा में आया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।



