बिग ब्रेकिंग: बद्रीनाथ चढ़ावा केस में साधु भगवान दास को SIT ने नहीं माना संदिग्ध, पुलिस रिमांड पर प्रमोद नौटियाल

बद्रीनाथ चढ़ावा केस में साधु भगवान दास को SIT ने नहीं माना संदिग्ध, पुलिस रिमांड पर प्रमोद नौटियाल

चमोली। बदरीनाथ धाम चढ़ावा प्रकरण की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। एक ओर सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले साधु भगवान दास को लेकर उठ रही अटकलों पर विराम लग गया है।

वहीं दूसरी ओर मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल से गहन पूछताछ के लिए एसआईटी को चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मिल गई है।

जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भगवान दास लगातार गणना कक्ष में दिखाई दिए थे, जिसके बाद उनकी भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि पुलिस और एसआईटी की प्रारंभिक जांच में फिलहाल उन्हें संदिग्ध नहीं माना गया है।

अधिकारियों के अनुसार भगवान दास लंबे समय से बदरीनाथ धाम में रह रहे साधु हैं और चढ़ावे की गणना के दौरान उनका गणना कक्ष में मौजूद रहना वर्षों से सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा रहा है।

पूछताछ के लिए संपर्क किए जाने पर भगवान दास ने फोन पर बताया कि किसी परिचित के निधन के कारण वह फिलहाल बदरीनाथ से बाहर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही धाम लौटकर एसआईटी के समक्ष उपस्थित होंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे।

बदरीनाथ थाना प्रभारी महादेव उनियाल ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में भगवान दास किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, चढ़ावे की रकम में हेराफेरी या नोट जेब में रखते हुए दिखाई नहीं दिए हैं। इसलिए वर्तमान साक्ष्यों के आधार पर उन्हें संदिग्ध की श्रेणी में नहीं रखा गया है।

इसी बीच मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट हिना कौसर की अदालत ने पुलिस के तीसरे प्रयास में 28 जुलाई से 31 जुलाई तक चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर कर दी है। इससे पहले दो बार पुलिस की रिमांड अर्जी अदालत ने खारिज कर दी थी।

अब एसआईटी प्रमोद नौटियाल से सीधे पूछताछ कर यह पता लगाएगी कि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी किस प्रकार की गई, इसके पीछे क्या कारण थे और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।

पूछताछ के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी से विस्तृत जानकारी ली जाएगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले को सबसे पहले भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री ने उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी की गई है। शिकायत के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति, पुलिस और सरकार की ओर से जांच शुरू की गई।

प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान बदरीनाथ के पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान का नाम भी सामने आया, जिन्हें भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। राजेंद्र चौहान 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे।

फिलहाल एसआईटी चढ़ावा प्रकरण की हर कड़ी की बारीकी से जांच कर रही है। गणना कक्ष में आने-जाने वाले सभी लोगों की भूमिका, सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच सुनिश्चित की जा सके। आने वाले चार दिनों की पूछताछ इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई नए खुलासे कर सकती है।