देहरादून में बड़े आंदोलन की तैयारी! आशाओं का सब्र टूटा, श्रमिकों ने भी खोला मोर्चा
देहरादून। उत्तराखंड में श्रमिक और स्कीम वर्कर्स से जुड़े संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।
हल्द्वानी में ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में आशा कार्यकर्ताओं ने 22 नवंबर को देहरादून में प्रस्तावित विशाल प्रदर्शन में पूरी ताकत के साथ शामिल होने का निर्णय लिया।
वहीं, रुद्रपुर में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने श्रमिकों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा।
11,500 रुपये मानदेय की मांग पर आशाओं का आंदोलन तेज
हल्द्वानी में हुई बैठक में आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय, कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट कम किए जाने से आशा कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण की राह में भी बाधा पैदा हो रही है। आशाओं पर लगातार काम का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि एक तरफ विधायकों के वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य समेत स्वास्थ्य विभाग के अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है।
सरकार को पुराने वादे की याद दिलाई
आशा यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ 31 अगस्त 2021 को हुई वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि उस समय आशाओं के लिए मासिक मानदेय तय करने और डीजी हेल्थ की ओर से तैयार प्रस्ताव को लागू करने का आश्वासन दिया गया था।
उन्होंने सरकार से आशा कार्यकर्ताओं को 11,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने के वादे को तत्काल पूरा करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
22 नवंबर को देहरादून में बड़ा प्रदर्शन
बैठक में 22 नवंबर को देहरादून में प्रस्तावित विशाल रैली की तैयारियों पर चर्चा हुई। यूनियन ने स्पष्ट किया कि प्रदेशभर की आशा हेल्थ वर्कर्स इसमें बड़ी संख्या में शामिल होंगी।
बैठक में राजीव डिमरी, इंद्रेश मैखुरी, केके बोरा, कमला कुंजवाल, रीता कश्यप, सरस्वती पुनेठा, मीना आर्य, बबीता कश्यप, अनीता अन्ना, बबीता सिनग्वाल, राधा देवी, रूप किशोरी और लीला बिष्ट समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे। संचालन यूनियन महामंत्री डॉ. कैलाश पाण्डेय ने किया।
रुद्रपुर में बीएमएस का 11 सूत्रीय मांगपत्र
दूसरी ओर, रुद्रपुर में भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई ने देशव्यापी आंदोलन के तहत श्रमिकों की 11 प्रमुख मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर नारेबाजी भी की।
बीएमएस की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-
- न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।
- ईएसआईसी की वेतन सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपये की जाए।
- ईपीएफ की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये की जाए।
- न्यूनतम ईपीएस पेंशन 7,500 रुपये प्रतिमाह की जाए।
- पेंशन में महंगाई भत्ते को जोड़ा जाए और पूर्ण चिकित्सा सुविधा दी जाए।
- बोनस की गणना की वेतन सीमा 7 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये की जाए।
- बोनस पात्रता की वेतन सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपये की जाए।
- आंगनबाड़ी, आशा और अन्य मानदेय/संविदा कर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी हो।
- समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए।
- ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 40 लाख रुपये की जाए।
- श्रमिक विरोधी प्रावधानों को हटाने और बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग की गई।
- एक तरफ आशाओं की रैली, दूसरी तरफ श्रमिकों का दबाव
उत्तराखंड में सामने आई इन दोनों गतिविधियों से साफ है कि आशा कार्यकर्ताओं से लेकर संगठित श्रमिक वर्ग तक अपने वेतन, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं।
22 नवंबर का देहरादून प्रदर्शन आशा कार्यकर्ताओं के आंदोलन का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है, जबकि बीएमएस ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों के जरिए केंद्र सरकार का ध्यान श्रमिक हितों की ओर खींचा है।


