नीट-यूजी फर्जीवाड़े में दून में 5 और ऊधमसिंह नगर में 7 गिरफ्तार। MBBS की 15 सीटें रद, 30 पर मुकदमा
देहरादून। नीट-यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस दाखिले के मामले में उत्तराखंड में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून पुलिस की एसआइटी ने सोमवार को संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया।
दोनों पर तीन अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज, आधार कार्ड, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने और उनके आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में सहयोग करने का आरोप है। इस कार्रवाई के साथ देहरादून में इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या पांच हो गई है।
इसी बीच एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर 12 और अभ्यर्थियों का एमबीबीएस सीट आवंटन निरस्त कर दिया। इससे पहले तीन सीटें निरस्त हो चुकी थीं। इस तरह अब तक कुल 15 एमबीबीएस सीटों का आवंटन रद किया जा चुका है।
तीन अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज बनवाने का आरोप
पुलिस के अनुसार संजय कुमार और गिरीश सिंह एक-दूसरे के पुराने परिचित हैं। जांच में दोनों की भूमिका स्वाति, परी और खुशी के कूटरचित दस्तावेज, आधार कार्ड, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने में सामने आई।
आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर तीनों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में मदद की गई और इसके बदले अनुचित धनराशि ली गई।
मामले की शुरुआत 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में दर्ज मुकदमों से हुई। ‘अपणी सरकार’ पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए किए गए आवेदनों की जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। इसके बाद दोनों थानों में मुकदमे दर्ज किए गए। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई प्रदीप बहुगुणा की प्रारंभिक शिकायत के बाद शुरू हुई।
गलत पतों से खुली फर्जीवाड़े की परत
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआइटी गठित की। टीम ने संबंधित दस्तावेज कब्जे में लेकर शिक्षण संस्थानों के रिकॉर्ड की जांच की। इस दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज कई पते गलत पाए गए।
शिक्षण संस्थानों से मिले रिकॉर्ड के आधार पर अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई गई। दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संजय कुमार और गिरीश सिंह की भूमिका सामने आने के बाद पूछताछ की गई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इससे पहले एसआइटी रुपेश पंडित, अरविंद कुमार और धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। देहरादून के दोनों मामलों में अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार हुए हैं, जबकि कुल 10 लोगों पर मुकदमे दर्ज हैं।
12 और अभ्यर्थियों की एमबीबीएस सीटें निरस्त
एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को जिलों से प्रमाणपत्र सत्यापन की रिपोर्ट मिलने के बाद 12 और अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त करना पड़ा। ये सभी मामले ऊधमसिंह नगर जिले से संबंधित हैं। अभ्यर्थियों ने स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीट हासिल की थी।
विश्वविद्यालय ने नीट-यूजी काउंसलिंग से जुड़े 778 प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए जिलों को भेजे थे। सत्यापन रिपोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
निरस्त सीटें हल्द्वानी, श्रीनगर, हरिद्वार, अल्मोड़ा और देहरादून के मेडिकल कॉलेजों में आवंटित थीं। इनमें 10 अभ्यर्थी दाखिला ले चुके थे, एक ने दाखिला नहीं लिया था और एक ने दाखिले के बाद सीट छोड़ दी थी। अब इन सीटों को आगे की काउंसलिंग में रिक्त माना जाएगा।
निरस्त सीटों वाले अभ्यर्थियों में अनुराग भोजवाल, दीक्षा कुमारी, अलसामी फाजिल, चित्रा, प्रियांशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, प्रभात चौधरी, आवंतिका डवास, वैनवी कुमार, दक्ष चतुर्वेदी, काजल भारद्वाज और दीपांशु शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार जिलों से सत्यापन रिपोर्ट लगातार प्राप्त हो रही है और फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
ऊधमसिंह नगर में 30 पर मुकदमा, सात गिरफ्तार
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच अब ऊधमसिंह नगर में भी व्यापक स्तर पर चल रही है। 28 सितंबर के उपलब्ध पुलिस-प्रशासनिक अपडेट के अनुसार जिले में अब तक 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
अलग-अलग मामलों में कम से कम सात आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इनमें बाजपुर के पांच और गदरपुर के दो आरोपित शामिल हैं।
बाजपुर में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मो. आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना और रोहित को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
जांच में फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र के साथ फर्जी किरायेदार सत्यापन कराने के आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस ने छह मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
बाजपुर के ही एक अन्य मामले में अलसामी फाजिल, उसके पिता तौफिक अहमद और रवि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में अलसामी के जाति प्रमाणपत्र के साथ लगाए गए गृहकर प्रमाणपत्र और रसीद के कूटरचित होने का आरोप है।
अलसामी का नाम विश्वविद्यालय की ओर से निरस्त की गई 12 एमबीबीएस सीटों की सूची में भी शामिल है। गदरपुर में 25 सितंबर को 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
इनमें शुभम हुड़िया, निखिल वर्मा, प्रमोद सैनी, शेखर अरोड़ा, लवी, प्रियांशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, आवंतिका डवास, वनवी कुमारी और प्रभात चौधरी के नाम शामिल हैं। पुलिस ने शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा को गिरफ्तार किया है। दोनों के कब्जे और निशानदेही से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, हार्ड डिस्क और एसएसडी बरामद किए गए हैं।
रुद्रपुर में भी दीपांशु, दक्ष चतुर्वेदी और शुभम हुड़िया के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
चार राजस्व कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई
फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण में प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन प्रक्रिया में भूमिका सामने आने पर चार राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। देहरादून में जगदीश राठौड़ और डिंपल को निलंबित किया गया है।
वहीं ऊधमसिंह नगर में बाजपुर के राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद अजमल खान और गदरपुर के राजस्व उपनिरीक्षक सरताज अली पर निलंबन की कार्रवाई हुई है।
बाजपुर में तहसीलदार की जांच में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने के बाद अजमल खान को निलंबित किया गया। वहीं गदरपुर में दस्तावेज सत्यापन में प्रथमदृष्टया लापरवाही पाए जाने के बाद सरताज अली पर कार्रवाई हुई।
इस तरह नीट-यूजी एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में अब तक देहरादून में पांच गिरफ्तारियां, ऊधमसिंह नगर में सात गिरफ्तारियां, 15 एमबीबीएस सीटों का निरस्तीकरण और ऊधमसिंह नगर में 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे सामने आ चुके हैं। साथ ही चार राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। एसआइटी और जिला प्रशासन की जांच जारी है।


