ऊंचे पहाड़ों में ट्रेकर्स का रेस्क्यू जारी, निचले इलाकों में जलभराव। बारिश-बर्फबारी से उत्तराखंड बेहाल
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने जनजीवन पर व्यापक असर डाला है। एक ओर उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर खटीमा में अस्पताल परिसर जलमग्न हो गया है, यमुनोत्री घाटी में भूधंसाव से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और कई जिलों में भूस्खलन तथा जलभराव की घटनाएं सामने आई हैं।
उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खराब मौसम के बीच 136 ट्रेकर्स, पर्वतारोही और सहयोगी स्टाफ फंस गए थे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करते हुए हेलीकॉप्टर, एसडीआरएफ, जिला पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और वन विभाग की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा।
प्रशासन के अनुसार ऑडेन कोल क्षेत्र में फंसे सभी 29 ट्रेकर्स को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित हर्षिल पहुंचा दिया गया है, जबकि अन्य ट्रेकिंग रूटों पर मौजूद लोगों को निकालने का अभियान लगातार जारी है।
इससे पहले गोमुख-तपोवन ट्रेक पर भारी बर्फबारी के कारण फंसे 121 ट्रेकर्स को भी वन विभाग की टीम ने सुरक्षित गंगोत्री पहुंचा दिया।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में समीक्षा बैठक कर सभी जिलों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने रेस्क्यू अभियानों के लिए पर्याप्त हेलीकॉप्टर उपलब्ध रखने, प्रत्येक हेलीकॉप्टर में सैटेलाइट फोन सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त हवाई संसाधन जुटाने के निर्देश दिए।
एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को भी संभावित आपात स्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। मौसम की मार निचले इलाकों में भी देखने को मिली। उधमसिंह नगर जिले के खटीमा उप जिला अस्पताल का मुख्य मार्ग और पूरा परिसर बारिश के पानी से जलमग्न हो गया।
मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मचारियों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निकासी की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है।
नैनीताल जिले के चोरगलिया क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान एक विशाल आम का पेड़ दो मकानों पर गिर गया, जिससे घरों को नुकसान पहुंचा और दो लोग घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य चलाया।
वहीं, उत्तरकाशी की यमुनोत्री घाटी में रानाचट्टी के पास भूधंसाव के कारण 11 केवी विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे यमुनोत्री धाम समेत गीठ पट्टी के कई गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित रही।
ऊर्जा निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, हालांकि लगातार बारिश और भूस्खलन से कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
लगातार बारिश और आपदा की घटनाओं के बीच चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए रोका गया था, लेकिन सोमवार को मौसम में सुधार होने के बाद यात्रा दोबारा शुरू कर दी गई।
प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मार्गों और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
इसी बीच उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने भविष्य में ट्रेकिंग सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 100 ट्रेक और हाइक रूट्स की GPS एवं GIS मैपिंग शुरू कर दी है।
इस परियोजना के तहत एक ऐसा मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है जो बिना नेटवर्क के भी काम करेगा और ट्रेकर्स को रास्ते, कैंप साइट, पानी के स्रोत, होमस्टे, गाइड और इमरजेंसी लोकेशन की जानकारी उपलब्ध कराएगा।
पर्यटन विभाग का मानना है कि इससे ट्रेकिंग को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उधर, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पौड़ी जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण उन्हें पैदल चलकर गांवों तक पहुंचना पड़ा।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता और शीघ्र राहत-पुनर्वास का भरोसा दिलाया। प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान भी कई जिलों में बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क है।
सरकार का फोकस फिलहाल रेस्क्यू अभियानों, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।


