अस्पतालों में अवैध वसूली, ICU का दुरुपयोग। पौड़ी जिला अस्पताल में बाइक स्टंट से सुरक्षा पर सवाल
देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। एक ओर आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, वहीं दूसरी ओर पौड़ी जिला अस्पताल के प्रतिबंधित क्षेत्र में एक युवक के बाइक स्टंट का वीडियो वायरल होने से अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयुष्मान योजना की आड़ में अवैध वसूली
गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार देने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान योजना के तहत कुछ निजी अस्पतालों की मनमानी का खुलासा राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) की छापेमार कार्रवाई में हुआ है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी के निर्देश पर निदेशक क्लेम डॉ. सरोज नैथानी के नेतृत्व में गठित टीम ने पावरलाइफ, प्रेमसुख, प्रकाशदीप, वेलमेड और सुनंदा मेडिकल सेंटर का औचक निरीक्षण किया।
जांच में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद पावरलाइफ अस्पताल, प्रकाशदीप अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की आयुष्मान योजना से संबद्धता निलंबित करने की संस्तुति की गई है। वहीं प्रेमसुख और सुनंदा अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाने की सिफारिश की गई है। सभी संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
प्रकाशदीप अस्पताल में डॉक्टर नहीं, मरीज नर्सों के भरोसे
निरीक्षण के दौरान प्रकाशदीप अस्पताल में सबसे गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। यहां मरीजों से 85 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की शिकायत मिली। अस्पताल का आईसीयू बदहाल स्थिति में पाया गया और दो गंभीर मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में एक भी उपचाररत डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि कई दिनों से नियमित चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं और पूरा इलाज नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा था।
पावरलाइफ अस्पताल में सामान्य मरीजों को ICU में भर्ती
पावरलाइफ अस्पताल में सामान्य वार्ड नहीं मिला और केवल एचडीयू व आईसीयू संचालित होते पाए गए। निरीक्षण के दौरान एक ऐसे मरीज को आईसीयू में भर्ती रखा गया था, जिसे केवल घबराहट और उल्टी की शिकायत थी।
जांच टीम को आशंका है कि चिकित्सकीय आवश्यकता के बिना मरीजों को आईसीयू में रखकर उपचार लागत बढ़ाई जा रही थी। अस्पताल में सूचना बोर्ड, टोल फ्री नंबर और मरीज जागरूकता सामग्री भी नहीं मिली। बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन के रिकॉर्ड भी महीनों से अपडेट नहीं थे।
प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान लाभार्थी से वसूले 48 हजार रुपये
प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान योजना के एक लाभार्थी से इलाज के नाम पर 48 हजार रुपये और अन्य मदों में अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायत सही पाई गई।
निरीक्षण में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर मिली, दिव्यांगों के लिए रैंप नहीं था और ऑपरेशन थिएटर की जिम्मेदारी प्रशिक्षित नर्स के बजाय तकनीकी कर्मचारी संभालता मिला।
सुनंदा मेडिकल सेंटर और वेलमेड में भी मिलीं खामियां
सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट में पर्याप्त वेंटिलेशन, आपातकालीन निकास और स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधन की गंभीर कमियां सामने आईं। डायलिसिस के लिए इस्तेमाल होने वाला आरओ सिस्टम भी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा।
वहीं, वेलमेड अस्पताल में योजना से जुड़े मरीजों की संख्या बेहद कम मिली। रैंप, जागरूकता सामग्री और कई जरूरी रिकॉर्ड अधूरे पाए गए।
एसएचए की इस कार्रवाई से आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें कारण बताओ नोटिस के जवाब और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
पौड़ी जिला अस्पताल में बाइक स्टंट, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
उधर, पौड़ी गढ़वाल के जिला अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक अस्पताल परिसर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बाइक चलाता दिखाई दे रहा है।
वीडियो में युवक बाइक लेकर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) के कक्ष तक पहुंचता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि उसने अस्पताल के वार्डों और गलियारों में भी बाइक दौड़ाई, जहां सामान्य तौर पर मरीजों और तीमारदारों का पैदल आवागमन होता है।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एलडी सेमवाल ने बताया कि मामले की शिकायत पुलिस को दे दी गई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मंगलवार 16 जून को एक अज्ञात युवक भवन संख्या-01 के प्रथम तल तक बाइक लेकर पहुंच गया। इस दौरान उसने कथित तौर पर स्टंट भी किए, जिससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया है कि संबंधित बाइक का पंजीकरण नंबर यूके07-2713 है। पुलिस अब युवक की पहचान कर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी में जुटी है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इन दोनों मामलों ने उत्तराखंड में चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी, जवाबदेही और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


