भाजपा के विजय रथ को रोकने की तैयारी! उत्तराखंड में कांग्रेस हाईकमान एक्टिव, AAP नेताओं को भी साधा
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस हाईकमान की सक्रियता इस बार पहले के मुकाबले काफी तेज दिखाई दे रही है। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड दौरे के बाद अब प्रियंका गांधी के भी प्रदेश दौरे की तैयारी है।
वहीं, कांग्रेस प्रदेश के अलग-अलग संगठनों और वर्गों से जुड़े लोगों के साथ संवाद बढ़ाकर चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है। इसी बीच देहरादून में आम आदमी पार्टी से जुड़े नेताओं और विभिन्न यूनियनों के लोगों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में है।
ऐसे में कांग्रेस के सामने जहां भाजपा के विजय रथ को रोकने की चुनौती है, वहीं संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और विभिन्न वर्गों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की भी कोशिश हो रही है।
राहुल-खड़गे के बाद प्रियंका की तैयारी
कांग्रेस हाईकमान की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी उत्तराखंड का दौरा कर चुके हैं और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी प्रदेश में पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।
प्रियंका गांधी के भी जल्द उत्तराखंड आने की तैयारी है।
राहुल गांधी की सक्रियता प्रदेश दौरों तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं, कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से भी उन्होंने मुलाकात की है।
पुरानी पेंशन बहाली, उपनल कर्मचारियों, नर्सिंग कर्मचारियों और बेरोजगारों से जुड़े प्रतिनिधिमंडलों ने भी राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी हैं।
राहुल गांधी अंकिता भंडारी के माता-पिता से भी मुलाकात कर चुके हैं और उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर लगातार उठा रहे हैं।
इससे संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस चुनाव से पहले प्रदेश के संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता देने की तैयारी में है।
कांग्रेस शासित राज्यों के सीएम भी आएंगे उत्तराखंड
कांग्रेस की रणनीति में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को उत्तराखंड बुलाने की योजना भी शामिल है।
पार्टी के स्तर पर कोशिश है कि दूसरे राज्यों में कांग्रेस सरकारों की योजनाओं और कामकाज को उत्तराखंड की जनता के सामने रखा जाए। इसके जरिए पार्टी चुनावी माहौल में अपने पक्ष में नैरेटिव तैयार करना चाहती है।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अमेंद्र बिष्ट का कहना है कि जनता का विश्वास राज्य और केंद्र सरकार से उठ रहा है और राहुल गांधी की स्वीकार्यता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी के उत्तराखंड दौरे के लिए भी कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है।
भाजपा ने साधा निशाना
कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को लेकर भाजपा ने भी निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान की उत्तराखंड में बढ़ी सक्रियता राज्य के प्रति चिंता से ज्यादा आगामी चुनाव में हार के डर का नतीजा है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस की रणनीति का चुनाव में कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
AAP नेताओं और यूनियन से जुड़े लोगों ने थामा कांग्रेस का हाथ
इधर, देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता रहे डीके पाल और उनके साथियों समेत ठेली, ऑटो यूनियन तथा विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने उन्हें कांग्रेस में शामिल कराया। इस दौरान हरक सिंह रावत ने अपने छात्र जीवन के संघर्षों और माता-पिता से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं।
उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में वह पहली बार ट्रेन देखने के लिए श्रीनगर से बिना बताए कोटद्वार चले गए थे। वहां से ट्रेन में बैठकर वह अनजाने में लक्सर पहुंच गए थे।
लक्सर में साइकिल स्टैंड पर किया काम
हरक सिंह रावत ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय उनके पास पैसे नहीं थे। लक्सर रेलवे स्टेशन के पास एक मिठाई की दुकान के साइकिल स्टैंड पर उन्होंने करीब एक सप्ताह काम किया। एक दिन दुकान के कर्मचारी के नहीं आने पर उनसे चाय के बर्तन साफ करने को कहा गया। दुकानदार की डांट से वह भावुक हो गए।
इसके बाद एक रोडवेज कंडक्टर ने उनकी मदद की और उन्हें हरिद्वार पहुंचाया। हरिद्वार में उन्होंने कुछ दिन चाट बेचकर गुजारा किया। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपने फौजी पिता की दी हुई घड़ी भी 20 रुपये में गिरवी रखनी पड़ी।
बाद में जब उनके पिता घड़ी छुड़ाने पहुंचे तो दुकानदार ने घड़ी लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनके पिता ने पुलिस में शिकायत की, जिसके बाद घड़ी वापस मिली।
हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने यह प्रसंग इसलिए साझा किया क्योंकि जीवन में संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, क्योंकि वे केवल जीवन ही नहीं देते बल्कि व्यक्ति के निर्माण, पालन-पोषण और संस्कारों की नींव भी रखते हैं।
कांग्रेस की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और दूसरे दलों से नेताओं व विभिन्न संगठनों के लोगों के जुड़ने के बीच अब निगाहें आगामी विधानसभा चुनाव पर हैं।
राहुल गांधी, खड़गे और प्रियंका गांधी की सक्रियता के साथ संगठन विस्तार की यह कवायद कांग्रेस को कितना चुनावी फायदा पहुंचाती है, इसका फैसला आने वाले महीनों में होगा।


