दून अस्पताल के डॉक्टर को ही नहीं मिला इलाज! ब्रेन स्ट्रोक के बाद मैक्स रेफर, उठे बड़े सवाल
- मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकुर पांडे की हालत गंभीर, ऑपरेशन की तैयारी। कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
देहरादून। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकुर पांडे को ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद गंभीर हालत में निजी मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उन्हें ऑपरेशन के लिए ले जाया जा रहा है। फिलहाल उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. अंकुर पांडे को अचानक मूर्छित अवस्था में दून अस्पताल लाया गया था। यहां उनका सीटी स्कैन किया गया, जिसमें ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई। इसके बाद चिकित्सकों ने माना कि इस गंभीर स्थिति का समुचित उपचार दून अस्पताल में संभव नहीं है, जिसके चलते उन्हें तत्काल मैक्स अस्पताल रेफर कर दिया गया।
दून अस्पताल की प्राचार्या ने भी पुष्टि की कि डॉ. अंकुर पांडे को ब्रेन स्ट्रोक हुआ है और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए मैक्स अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल उन्हें ऑपरेशन के लिए ले जाया जा रहा है।
डॉ. अंकुर पांडे दून अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों में शामिल हैं। वे प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार करते हैं और हर महीने हजारों मरीज उनकी ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे चिकित्सक को भी गंभीर स्थिति में सरकारी अस्पताल में आवश्यक इलाज उपलब्ध नहीं हो पाना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दून अस्पताल राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल और रेफरल सेंटर है।
यदि यहां ब्रेन स्ट्रोक जैसे गंभीर मामलों के उपचार की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, तो आर्थिक रूप से कमजोर, मध्यम वर्गीय और आयुष्मान भारत योजना पर निर्भर मरीजों के सामने उपचार का विकल्प क्या होगा? निजी अस्पतालों का महंगा इलाज अधिकांश परिवारों की पहुंच से बाहर है।
इस मामले पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टर को ही ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी का इलाज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और उन्हें निजी अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है, तो आम जनता की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने के दावे करती है, लेकिन यह घटना उन दावों की वास्तविकता उजागर करती है।
डॉ. प्रतिमा सिंह ने सरकार से दून अस्पताल सहित सभी बड़े सरकारी अस्पतालों में न्यूरो और आपातकालीन उपचार की आधुनिक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर न होना पड़े।
फिलहाल डॉ. अंकुर पांडे का इलाज मैक्स अस्पताल में जारी है और चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं, इस घटना ने उत्तराखंड की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


