आपदा मद के ₹8.64 लाख के निर्माण पर भ्रष्टाचार के आरोप। मुख्य सचिव से शिकायत, FIR की मांग
- ओखलढूंगा प्राथमिक विद्यालय की रिटेनिंग वॉल में कुछ महीनों में दरारें, आरटीआई कार्यकर्ता ने लगाए सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप
हल्द्वानी/भीमताल। नैनीताल जिले के विकासखंड भीमताल स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ग्राम ओखलढूंगा में आपदा मद से कराए गए निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सरकारी धन की वसूली की मांग की है।
शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, सचिव विद्यालयी शिक्षा, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, सचिव सतर्कता विभाग, आयुक्त कुमाऊँ मंडल, जिलाधिकारी नैनीताल, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग, उप शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी भीमताल सहित अन्य संबंधित अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को भी भेजी गई है।
प्राकृतिक आपदा के बाद स्वीकृत हुआ था निर्माण
शिकायत के अनुसार प्राकृतिक आपदा में विद्यालय की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी और पहाड़ी से लगातार मलबा आने के कारण बच्चों एवं विद्यालय भवन की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी।
इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री कार्यालय, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से लगातार शिकायतें की गईं, जिसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।
दावा किया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी के प्रस्ताव, उप शिक्षा अधिकारी भीमताल की निरीक्षण रिपोर्ट, ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा तैयार लगभग ₹8.64 लाख के तकनीकी प्राक्कलन, आपदा जांच रिपोर्ट और अन्य सरकारी अभिलेखों के आधार पर सुरक्षा दीवार, रिटेनिंग वॉल, छत सहित आवश्यक निर्माण कार्य स्वीकृत कराए गए।
कुछ महीनों में ही दीवारों में पड़ीं दरारें
शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों के भीतर नई रिटेनिंग वॉल में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं और कई स्थानों पर निर्माण क्षतिग्रस्त हो गया। उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब रही, जिससे भविष्य में बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
आरोप है कि निर्माण के दौरान कई बार लिखित शिकायतें और निरीक्षण होने के बावजूद गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया। साथ ही संबंधित ठेकेदार कई आवश्यक कार्य अधूरे छोड़कर चला गया और तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
आरटीआई दस्तावेजों का दिया हवाला
हेमंत सिंह गौनिया ने शिकायत के समर्थन में जिला शिक्षा अधिकारी का 12 अगस्त 2025 का पत्र, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की कार्रवाई, उप शिक्षा अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट, ग्रामीण निर्माण विभाग का तकनीकी प्राक्कलन, आपदा जांच रिपोर्ट, आरटीआई से प्राप्त प्रमाणित अभिलेख, निर्माण कार्य के फोटोग्राफ तथा पूर्व में विभिन्न विभागों को भेजे गए शिकायत पत्रों को साक्ष्य के रूप में संलग्न करने का दावा किया है।
ये हैं प्रमुख मांगें
शिकायत में मुख्य सचिव से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा आईआईटी, एनआईटी या किसी स्वतंत्र सरकारी एजेंसी से निर्माण गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए।
साथ ही दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, संबंधित कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान विवरण, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, उपयोग की गई सामग्री, बिल-वाउचर और अन्य अभिलेखों का तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराने, दोषी अधिकारियों और ठेकेदार से सरकारी धन की वसूली करने, दोषपूर्ण निर्माण हटाकर तकनीकी मानकों के अनुरूप पुनर्निर्माण कराने तथा जांच पूरी होने तक विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
हेमंत सिंह गौनिया का कहना है कि यह मामला केवल घटिया निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, सरकारी धन की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय है।
उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
(नोट: समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित विभागों या निर्माण एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


