दूषित पानी से मौतों पर अफसर तलब, UCC पर सुनवाई 12 अक्टूबर तक टली
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करते हुए एक ओर नैनीताल के ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पेयजल से फैली बीमारियों और मौतों पर कड़ा रुख अपनाया, वहीं यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई 12 अक्टूबर तक स्थगित कर दी।
नैनीताल के ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल समेत आसपास के गांवों में दूषित पानी के कारण डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियों के फैलने तथा तीन लोगों की मौत के मामले में अदालत ने गंभीर चिंता जताई।
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, जल संस्थान के महाप्रबंधक और पेयजल निगम के मुख्य अभियंता को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
अदालत ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ एवं संदूषण-मुक्त पेयजल उपलब्ध कराने और समस्या के स्थायी समाधान का रोडमैप पेश करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, प्रदेश में लागू यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के खिलाफ दायर 11 जनहित याचिकाओं और संबंधित मामलों की सुनवाई भी इसी खंडपीठ के समक्ष हुई।
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उपस्थित न हो पाने के कारण अतिरिक्त समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की गई। याचिकाकर्ताओं ने यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी है।
अदालत ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक अपने रुख और संभावित संशोधनों पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।


