केदारनाथ में आस्था का सैलाब, जाम और धार्मिक विवादों के बीच बढ़ी व्यवस्थागत चुनौती
देहरादून। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। बाबा केदार के दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच केदारनाथ धाम का पैदल मार्ग कई स्थानों पर जाम की स्थिति से जूझ रहा है।
वहीं, दूसरी ओर केदारनाथ धाम की धार्मिक व्यवस्थाओं से जुड़े दो बड़े विवाद रावल उत्तराधिकार प्रकरण और गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारी नियुक्ति विवाद भी चर्चा के केंद्र में हैं। इन घटनाक्रमों ने यात्रा प्रबंधन और मंदिर प्रशासन दोनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
केदारनाथ धाम के 19 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर भीमबली, लिनचोली, जंगलचट्टी सहित कई संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों की भारी भीड़ के कारण लंबा जाम लग रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में हजारों श्रद्धालु संकरे रास्तों पर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। घोड़ा-खच्चरों, पालकियों और पैदल यात्रियों की एक साथ आवाजाही के कारण कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही है।
श्रद्धालुओं ने मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। लगातार बढ़ती भीड़ के बीच किसी भी आपात स्थिति की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने कहा है कि यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और श्रद्धालुओं को संकरे स्थानों पर लाइन बनाकर चलने की सलाह दी जा रही है।
इसी बीच केदारनाथ धाम में रावल उत्तराधिकार को लेकर विवाद भी गहराता जा रहा है। फरवरी 2026 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग शंकराचार्य द्वारा अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग महाराज को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य रावल के दो अन्य शिष्यों ने इस प्रक्रिया को परंपराओं और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की नियमावली के विरुद्ध बताते हुए गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
शिष्यों का कहना है कि केदारनाथ रावल का पद आजीवन होता है और नए रावल की नियुक्ति का अधिकार केवल बीकेटीसी के पास है। उनका दावा है कि वर्तमान में रावल का पद रिक्त नहीं है।
इसलिए किसी भी व्यक्ति को उत्तराधिकारी घोषित करना न तो परंपरा के अनुरूप है और न ही नियमों के तहत वैध माना जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रचार से श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
विवाद का एक और अध्याय गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में हाल ही में हुई पुजारी नियुक्ति को लेकर सामने आया है। बीकेटीसी द्वारा नियुक्त पुजारी ईश्वर लिंग ने अपनी नियुक्ति को चुनौती दिए जाने पर मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी को विस्तृत पत्र भेजकर अपना पक्ष रखा है।
उन्होंने दावा किया कि उनकी नियुक्ति पूरी तरह नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई है तथा वे वर्षों से मंदिर परंपराओं से जुड़े रहे हैं।
ईश्वर लिंग ने अपने पत्र में कहा है कि कुछ लोग उनकी नियुक्ति को निरस्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि उन्हें मंदिर समिति की स्वीकृत प्रक्रिया के तहत नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में कई नियुक्तियों में नियमों और परंपराओं की अनदेखी की गई।
साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी नियुक्ति के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई तो वे परिवार सहित ऊखीमठ मंदिर परिसर में आमरण अनशन शुरू करेंगे।
चारधाम यात्रा के सबसे व्यस्त दौर में सामने आए ये तीनों घटनाक्रम केदारनाथ पैदल मार्ग पर जाम, रावल उत्तराधिकार विवाद और पुजारी नियुक्ति विवाद धार्मिक व्यवस्थाओं और प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि यात्रा की बढ़ती भीड़ के साथ-साथ धार्मिक संस्थाओं से जुड़े विवादों का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है, ताकि आस्था के इस महापर्व की गरिमा और व्यवस्थाएं दोनों सुरक्षित रह सकें।

