उत्तराखंड हाईकोर्ट की दोहरी फटकार, भर्ती और भ्रष्टाचार जांच पर जवाब-तलब
- पूर्व सैनिक की भर्ती निरस्त करने पर आयोग से स्पष्टीकरण, आय से अधिक संपत्ति मामले में सरकार से दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को दो अलग-अलग मामलों में राज्य सरकार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) से जवाब तलब कर महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
पहले मामले में ग्रुप-सी भर्ती में पूर्व सैनिक का आवेदन निरस्त किए जाने पर आयोग से स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि दूसरे मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेवानिवृत्त इंजीनियर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर सरकार से जांच की वर्तमान स्थिति बताने को कहा गया है।
पहले मामले में भूतपूर्व सैनिक टीका सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता का कहना है कि लिखित परीक्षा, आयु पात्रता, टाइपिंग टेस्ट और दस्तावेज सत्यापन सहित सभी चरण सफलतापूर्वक पूरा करने के बावजूद आयोग ने उनका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया।
आयोग ने इसके लिए 22 मई 2020 के शासनादेश का हवाला दिया, जिसमें एक बार केंद्र सरकार की नौकरी में पूर्व सैनिक आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थी को दोबारा यह लाभ न देने का प्रावधान बताया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही इस शासनादेश को कानून के विपरीत मान चुकी है। वर्ष 1993 के लागू अधिनियम में पूर्व सैनिक की परिभाषा तो दी गई है, लेकिन दोबारा आरक्षण का लाभ लेने पर कोई रोक नहीं है।
इस पर अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए आयोग से पूछा कि खंडपीठ के आदेश के बावजूद किस आधार पर चयन निरस्त किया गया। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
दूसरे मामले में मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग के एक सेवानिवृत्त इंजीनियर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत पर सुनवाई की।
कोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर यह बताने को कहा है कि विजिलेंस जांच की वर्तमान स्थिति क्या है।
याचिकाकर्ता देहरादून निवासी जितेंद्र सिंह ने जनहित याचिका में कहा कि उन्होंने 11 अक्टूबर 2023 को विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी उन्हें जांच की स्थिति की कोई जानकारी नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी बताया कि सूचना प्राप्त करने के लिए आरटीआई दायर की गई, लेकिन विजिलेंस ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 24(2) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है। दोनों मामलों में अदालत की अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा।


