एक्शन: फर्जी प्रमाणपत्रों पर शिक्षा विभाग का शिकंजा, बागेश्वर में 10 शिक्षक बर्खास्त। सैकड़ों की जांच जारी

फर्जी प्रमाणपत्रों पर शिक्षा विभाग का शिकंजा, बागेश्वर में 10 शिक्षक बर्खास्त। सैकड़ों की जांच जारी

देहरादून। उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है।

राज्य के विभिन्न जिलों से मिली शिकायतों के आधार पर चल रही जांच में कई शिक्षकों के शैक्षणिक और टीईटी (TET) प्रमाणपत्र संदेह के घेरे में आए हैं। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर विभाग अब सख्त कार्रवाई कर रहा है।

शिक्षा विभाग के अनुसार, मामला केवल कुछ शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सैकड़ों शिक्षक जांच के दायरे में हैं। इनमें बड़ी संख्या उन शिक्षकों की बताई जा रही है जो जिला कैडर के तहत पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।

विभाग को आशंका है कि कुछ मामलों में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के साथ-साथ टीईटी और स्थायी निवास प्रमाणपत्र भी फर्जी हो सकते हैं।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत ने बताया कि विभिन्न जिलों में ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। प्रमाणपत्रों की जांच लगातार जारी है और जहां भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

इस अभियान के तहत बागेश्वर जिले में 10 शिक्षकों को बर्खास्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की लंबे समय से जांच चल रही थी। जांच रिपोर्ट में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई।

शिक्षा विभाग का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर है, लेकिन इसके बाद यह भी जांच की जाएगी कि इन नियुक्तियों के दौरान सरकारी तंत्र के विभिन्न स्तरों पर किस प्रकार की भूमिका रही। यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, जहां फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षक वर्षों तक पढ़ाते रहे।

विभाग के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं जिला स्तर पर पूरी होती हैं, इसलिए बर्खास्तगी के आदेश भी संबंधित जिलों द्वारा जारी किए जा रहे हैं।