रेखा आर्या विवाद में पति की तलाश, CM धामी का बयान, 210 करोड़ के आरोप और फार्म हाउस की जांच
देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद अब पारिवारिक मामले से आगे बढ़कर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
एक ओर रेखा आर्या ने अपने पति के खिलाफ मारपीट, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, धोखाधड़ी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है।
तो दूसरी ओर गिरधारी लाल साहू ने मंत्री पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
इस बीच मामले की जांच कर रही देहरादून पुलिस गिरधारी लाल साहू की तलाश में जुटी है। उनके नेपाल में होने की आशंका के मद्देनजर नेपाली अधिकारियों से संपर्क किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस उनके संभावित ठिकानों, मोबाइल की आखिरी लोकेशन और कॉल डिटेल जैसे तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। वहीं, विदेश जाने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।
इधर, उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित लालपुर गांव में एक आलीशान फार्म हाउस का मामला भी सुर्खियों में है। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के मुताबिक, फार्म हाउस का मानचित्र स्वीकृत नहीं है और निर्माण से संबंधित अभिलेखों की जांच की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान, भाजपा संगठन के रुख और विपक्ष के सवालों के बीच प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
पति के खिलाफ एफआईआर, एसआईटी कर रही जांच
मामले की शुरुआत 15 अक्टूबर को हुई, जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने मारपीट, घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए।
रेखा आर्या ने यह आरोप भी लगाया कि उनके पति ने पहली शादी की बात छिपाकर उनसे विवाह किया। इसके अलावा, उन्होंने कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें निदेशक पद से हटाए जाने का आरोप भी लगाया है।
मंत्री ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए अपनी हत्या की साजिश रचे जाने की आशंका भी जताई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एसपी देहात जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया।
जांच टीम शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की पड़ताल कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
गिरधारी लाल साहू की तलाश में पुलिस, नेपाल में होने की आशंका
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से गिरधारी लाल साहू की लोकेशन को लेकर पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक, मामला गंभीर है और पुलिस की प्राथमिकता गिरधारी लाल की तलाश कर उन्हें जांच में शामिल करना है।
पुलिस उनके संभावित ठिकानों के साथ मोबाइल की आखिरी लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही है। नेपाल में उनकी संभावित मौजूदगी को लेकर भी पड़ताल की जा रही है। विदेश जाने की आशंका के बीच लुक आउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
वहीं, एसआईटी की टीम जांच के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के बरेली भी पहुंची। वहां साहू से जुड़े संभावित ठिकानों पर तलाश के साथ पुराने मुकदमों और कंपनियों से संबंधित दस्तावेज जुटाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पुलिस को वहां भी गिरधारी लाल साहू नहीं मिले।
अब जांच टीम बरेली से जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य जानकारियों का परीक्षण कर रही है। आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और एसआईटी की जांच इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
210 करोड़ की कथित संपत्ति के आरोपों से गरमाई सियासत
रेखा आर्या की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद गिरधारी लाल साहू ने भी सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।
उन्होंने मंत्री पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप लगाए। साहू ने रेखा आर्या की ओर से साझा की गई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी एआई से तैयार होने का दावा करते हुए खारिज किया है।
दूसरी ओर, रेखा आर्या ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। ऐसे में दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच कथित संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दावों की स्वतंत्र जांच का सवाल भी उठ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 23 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति और बरेली स्थित फार्म हाउस को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने फार्म हाउस में कथित तौर पर बिना स्वीकृत मानचित्र के किए गए निर्माण का मुद्दा भी उठाया।
कांग्रेस इससे पहले भी इस प्रकरण को लेकर भाजपा और प्रदेश सरकार पर सवाल उठाती रही है। विपक्ष की मांग है कि कथित संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, केवल आरोप लगाए जाने से किसी संपत्ति को अवैध या किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। इन दावों की सत्यता संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
बरेली का आलीशान फार्म हाउस बीडीए की जांच के दायरे में
रेखा आर्या से जुड़े विवाद के बीच बरेली के इज्जतनगर क्षेत्र के लालपुर गांव स्थित एक आलीशान फार्म हाउस भी चर्चा में आ गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 12 हजार वर्ग मीटर में फैले इस परिसर में तीन मंजिला कोठी, गेस्ट हाउस और स्वीमिंग पूल सहित कई निर्माण हैं।
बरेली विकास प्राधिकरण के अनुसार, फार्म हाउस का मानचित्र स्वीकृत नहीं है। प्राधिकरण अब निर्माण से संबंधित अभिलेखों, जमीन के स्वामित्व और कंपाउंडिंग के लिए किए गए आवेदन की स्थिति की जांच कर रहा है।
बीडीए के विशेष कार्याधिकारी अजीत सिंह के मुताबिक, लालपुर स्थित परिसर की जमीन अलग-अलग गाटा संख्या में विभिन्न लोगों के नाम पर दर्ज है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेखा आर्या के नाम पर 3,300 वर्ग मीटर भूमि का बैनामा दर्ज है, जबकि कुछ अन्य जमीन कृष्णा वैष्णवी इंटरप्राइजेज के नाम पर बताई गई है।
कंपनी में शेयरधारिता से संबंधित जानकारी का उल्लेख रेखा आर्या के चुनावी हलफनामों में होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, परिसर की सभी जमीनों के स्वामित्व और संबंधित पक्षों की भूमिका को समझने के लिए अभिलेखों की पूरी जांच जरूरी है।
2024 में कंपाउंडिंग के लिए हुआ था आवेदन
बीडीए से मिली जानकारी के अनुसार, फार्म हाउस में किए गए निर्माण की कंपाउंडिंग के लिए वर्ष 2024 में आवेदन किया गया था। बताया गया है कि यह आवेदन पप्पू गिरधारी के करीबी सत्येंद्र राठौर की ओर से किया गया था, लेकिन निर्धारित शुल्क जमा नहीं होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
बीडीए सचिव हिमांशु गुप्ता के मुताबिक, प्राधिकरण ने जनवरी 2026 में कमियां दूर करने के लिए नोटिस दिया था। इसके बाद सितंबर 2026 में भी नोटिस जारी किया गया। संबंधित पक्ष की ओर से तीन महीने का समय मांगे जाने की बात भी सामने आई है।
प्राधिकरण का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कमियां दूर नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निर्माण और जमीन से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल जारी है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मानचित्र स्वीकृत नहीं होने और कंपाउंडिंग की प्रक्रिया अधूरी रहने का मामला प्राधिकरण के नियामकीय दायरे में आता है। इससे अपने आप किसी अन्य आरोप की पुष्टि नहीं होती। फार्म हाउस की जमीन, निर्माण और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
खजान दास के बयान और सीएम धामी की टिप्पणी से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
रेखा आर्या प्रकरण में भाजपा नेताओं के बयानों ने भी राजनीतिक बहस को तेज किया है। 19 अक्टूबर को कैबिनेट मंत्री खजान दास ने मामले पर टिप्पणी करते हुए रेखा आर्या को घरेलू हिंसा से पीड़ित बताया था, लेकिन साथ ही इतने लंबे समय बाद आरोप सामने आने को लेकर सवाल भी उठाए थे।
उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई कि इस संवेदनशील प्रकरण को लेकर पार्टी के भीतर क्या रुख है और संगठन आगे क्या कदम उठाएगा।
इसके बाद 22 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मामले को संवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोष का निर्धारण कानून के अनुसार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जब दोनों करीब 22 साल तक साथ रहे, तो इतने लंबे समय बाद आरोप सामने आने की वजह क्या है। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल किसी का नाम सामने आने या आरोप लगाए जाने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के संबंध में भी मुख्यमंत्री ने उसकी प्रामाणिकता की जांच पर जोर दिया। उनके बयान से सरकार का सार्वजनिक रुख सामने आया कि मामले में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
हालांकि, भाजपा संगठन की ओर से इस पूरे मामले पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या रेखा आर्या के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा असर?
राजनीतिक जानकार आदेश त्यागी का मानना है कि यह मामला रेखा आर्या के राजनीतिक जीवन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, अभी तक संगठन या किसी बड़े नेता की ओर से जिस तरह के स्पष्ट समर्थन की अपेक्षा की जा रही थी, वह खुलकर सामने नहीं आया है।
उनका यह भी कहना है कि विवाद की चर्चा की तीव्रता में बदलाव के बावजूद इसके राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक जानकार सुनील दत्त पांडे के अनुसार, रेखा आर्या के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर उन्हें अपने पति के खिलाफ दर्ज शिकायत से संबंधित जांच में सहयोग करना है, तो दूसरी ओर पति की तरफ से लगाए गए कथित वित्तीय आरोपों पर भी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है।
उनका कहना है कि रेखा आर्या सरकार की अनुभवी मंत्रियों में शामिल हैं और धामी मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ऐसे में इस प्रकरण का असर उनकी सार्वजनिक छवि और राजनीतिक भूमिका पर पड़ सकता है।
हालांकि, किसी नेता के राजनीतिक भविष्य पर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। जांच के नतीजे, सरकार और संगठन का अगला कदम तथा दोनों पक्षों की ओर से सामने आने वाले साक्ष्य इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
अब एसआईटी की जांच और बीडीए की कार्रवाई पर टिकी नजर
रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद अब कई स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। एक तरफ देहरादून पुलिस घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, धोखाधड़ी और अन्य आरोपों की जांच कर रही है।
कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल भी महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, बरेली विकास प्राधिकरण फार्म हाउस के मानचित्र, निर्माण और जमीन के स्वामित्व से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है।
राजनीतिक स्तर पर कांग्रेस कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पर जोर दिया है। भाजपा संगठन का रुख और इस प्रकरण के राजनीतिक परिणाम भी चर्चा के केंद्र में हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जांच एजेंसियों को क्या साक्ष्य मिलते हैं और संबंधित आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच, गिरधारी लाल साहू की तलाश और बरेली विकास प्राधिकरण की कार्रवाई से इस विवाद के कई पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।




