बिग ब्रेकिंग: मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी पर हाईकोर्ट सख्त, गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश

मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी पर हाईकोर्ट सख्त, गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश

  • मुख्य सचिव को 9 माह में विकास नीति तैयार करने का आदेश, तपोवन घाटों पर सुरक्षा कमियों का ब्यौरा मांगकर डीएम टिहरी को कार्रवाई के निर्देश

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने मसूरी में बढ़ते पर्यटक दबाव, अनियंत्रित विकास और पर्यावरणीय चुनौतियों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी (भार वहन क्षमता) के अनुरूप विकास नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, गंगा नदी के किनारे स्थित तपोवन के विभिन्न स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने सिटीजन फॉर ग्रीन दून और सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को नौ माह के भीतर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस अवधि में अपने सुझाव और आंकड़े सीधे सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। साथ ही, एनजीटी द्वारा मसूरी को लेकर पूर्व में जारी निर्देशों और रिपोर्टों को भी प्रस्तावित नीति में शामिल किया जाए।

याचिका में कहा गया कि वर्ष 2000 में मसूरी आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 8.5 लाख थी, जो 2019 तक बढ़कर लगभग 30 लाख पहुंच गई। जबकि शहर की पार्किंग क्षमता सीमित है।

सड़क विस्तार, नई परियोजनाओं और प्रस्तावित देहरादून-मसूरी रोपवे के कारण पर्यावरण, यातायात, पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।

इसी दौरान हाईकोर्ट ने तपोवन क्षेत्र के साईं घाट, हनुमान घाट, नीम बीच, गौ घाट, पूर्णानंद घाट और स्वामी नारायण घाट समेत अन्य स्नान स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जनहित याचिका पर भी सुनवाई की।

अदालत ने याचिकाकर्ता को दस दिन के भीतर सुरक्षा संबंधी कमियों का विस्तृत प्रत्यावेदन टिहरी जिलाधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए। साथ ही डीएम को आठ सप्ताह के भीतर मामले का परीक्षण कर आवश्यक आदेश जारी करने को कहा।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि क्षेत्र में जल पुलिस, एसडीआरएफ और पीएसी की तैनाती रहती है तथा लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक किया जाता है।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह जनसुरक्षा का विषय है और सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

अदालत ने गंगा के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए समय-समय पर बैरिकेडिंग, गहराई संबंधी संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाने पर जोर दिया, ताकि डूबने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।