कांवड़ यात्रा 2026 के लिए एक्सप्रेसवे और मसूरी कांवड़ियों के लिए बंद, नई गाइडलाइन जारी
देहरादून। 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार, पुलिस और जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार तीन से चार करोड़ शिवभक्तों के उत्तराखंड पहुंचने का अनुमान है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। सबसे अहम निर्णय दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और मसूरी मार्ग को कांवड़ियों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित करना है, ताकि सामान्य यातायात प्रभावित न हो और यात्रा सुरक्षित ढंग से संपन्न कराई जा सके।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित
इस बार किसी भी कांवड़िये को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर प्रवेश नहीं मिलेगा। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। भगवानपुर बॉर्डर से ही श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा।
एक्सप्रेसवे केवल सामान्य वाहनों, एम्बुलेंस, दमकल और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए खुला रहेगा। प्रशासन का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों की आवाजाही होने से देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में भारी ट्रैफिक दबाव पैदा हो सकता है।
मसूरी घूमने पर भी रोक
हर साल बड़ी संख्या में कांवड़िये हरिद्वार पहुंचने से पहले मसूरी घूमने चले जाते हैं, जिससे शहर में भीड़ और जाम की स्थिति बनती है। इसे रोकने के लिए इस बार भी मसूरी में कांवड़ियों की एंट्री पर रोक रहेगी।
सहारनपुर पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि गागलहेड़ी, छुटमलपुर और बिहारीगढ़ में ऐसे श्रद्धालुओं को रोककर हरिद्वार की ओर भेजा जाए जो देहरादून होते हुए मसूरी जाने की कोशिश करेंगे।
रायवाला-ऋषिकेश और नीलकंठ मार्ग पर विशेष निगरानी
हरिद्वार से ऋषिकेश और नीलकंठ महादेव मंदिर तक सबसे अधिक भीड़ रहने की संभावना है। इस पूरे मार्ग को कई सेक्टरों में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। बैरिकेडिंग, सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था रहेगी।
नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए ऋषिकेश का आईडीपीएल क्षेत्र मुख्य पार्किंग बनाया गया है, जहां से आगे की यात्रा नियंत्रित तरीके से कराई जाएगी।
डाक कांवड़ के लिए अलग ट्रैफिक प्लान
8 से 11 अगस्त के बीच चलने वाली डाक कांवड़ को देखते हुए भगवानपुर से देहरादून तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। तेज गति से चलने वाले डाक कांवड़ियों और सामान्य यातायात के बीच किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा।
कांवड़ियों के लिए सख्त एसओपी
- हरिद्वार पुलिस ने श्रद्धालुओं के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- जुगाड़ वाहन, रेट्रो साइलेंसर और संशोधित बाइक प्रतिबंधित।
- त्रिशूल, भाला, तलवार, बेसबॉल बैट सहित किसी भी प्रकार के हथियार लाने पर रोक।
- पैदल कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 6 फीट और झांकी की ऊंचाई 10 फीट निर्धारित।
- शराब या किसी भी नशीले पदार्थ के सेवन की हालत में प्रवेश नहीं मिलेगा।
- प्रत्येक श्रद्धालु के लिए वैध पहचान पत्र रखना अनिवार्य।
- चलती ट्रेन की छत या अन्य असुरक्षित तरीके से यात्रा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर
पुलिस उन लोगों पर विशेष निगरानी रखेगी जो कांवड़िये का भेष धारण कर विवाद या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। सड़क पर मारपीट, स्टंट, तोड़फोड़, तेज आवाज में डीजे, जबरन रास्ता रोकना और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साइबर टीम भी लगातार निगरानी करेगी।
हरिद्वार-बिजनौर पुलिस का साझा एक्शन प्लान
कांवड़ यात्रा को लेकर हरिद्वार और बिजनौर पुलिस की अंतरराज्यीय बैठक में ट्रैफिक डायवर्जन, भारी वाहनों की आवाजाही, बॉर्डर चेकिंग, डीजे संचालन, भीड़ नियंत्रण और वायरलेस संचार व्यवस्था को लेकर संयुक्त रणनीति बनाई गई है।
सीएम धामी की चेतावनी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सभी कांवड़ियों का स्वागत करती है और यात्रा को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने के लिए सभी इंतजाम किए गए हैं।
घाटों की सफाई, पार्किंग, आवास, परिवहन, जल पुलिस और ट्रैफिक प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी व्यक्ति कांवड़ यात्रा में बाधा डालेगा या कानून-व्यवस्था भंग करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील
प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों का उपयोग करने, पहचान पत्र साथ रखने, नशे से दूर रहने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने, ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का सम्मान करने, सफाई बनाए रखने और यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।
कांवड़ यात्रा का कार्यक्रम
- 30 जुलाई: कांवड़ यात्रा का शुभारंभ
- 31 जुलाई से 4 अगस्त: पैदल कांवड़ियों की सर्वाधिक भीड़
- 8 से 11 अगस्त: डाक कांवड़ संचालन
- 11 अगस्त: शिवालयों में जलाभिषेक और यात्रा का समापन
इस बार प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि कांवड़ यात्रा आस्था और अनुशासन का पर्व है। यदि सभी श्रद्धालु निर्धारित नियमों का पालन करेंगे तो करोड़ों शिवभक्तों की यात्रा सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई जा सकेगी।


