खास खबर: मिलावटखोरों पर शिकंजा, प्रदूषण पर चिंता और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन सख्त

मिलावटखोरों पर शिकंजा, प्रदूषण पर चिंता और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन सख्त

देहरादून। उत्तराखंड में जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई तेज कर दी है। हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावटखोरी के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है।

वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड काशीपुर और ऋषिकेश की गिरती वायु गुणवत्ता रैंकिंग को सुधारने की तैयारी में जुट गया है। दूसरी ओर देहरादून जिला प्रशासन सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।

हरिद्वार में पिछले करीब पांच महीनों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न खाद्य पदार्थों के लगभग 400 नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीजेएम और एडीएम कोर्ट में 71 वाद दायर किए गए हैं।

11 मामलों में 5.65 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है, जबकि तीन मामलों में छह माह की सजा और आर्थिक दंड का आदेश भी दिया गया है।

विभाग ने पनीर, मावा, दूध, घी और मिठाइयों सहित कई खाद्य पदार्थों के खराब या मानकविहीन पाए जाने पर उन्हें नष्ट भी कराया है। त्योहारी सीजन को देखते हुए दूध से बने उत्पादों और मिर्च-मसालों की विशेष निगरानी की जा रही है।

उधर, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में काशीपुर और ऋषिकेश की रैंकिंग में गिरावट के बाद उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सक्रिय हो गया है।

बोर्ड अब अन्य राज्यों में अपनाई जा रही सफल तकनीकों और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की तैयारी कर रहा है।

सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का उपयोग बढ़ाने तथा काशीपुर में कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।

वहीं देहरादून में सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने सभी विभागों को अपनी परिसंपत्तियों की सेटेलाइट पॉलीगॉन मैपिंग कर उत्तराखंड सरकारी परिसंपत्ति प्रणाली (यूके-जीएएमएस) पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।

कार्य शुरू न करने वाले 12 विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर दर्ज अतिक्रमणों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

इन तीनों मोर्चों पर चल रही कार्रवाई से साफ है कि राज्य सरकार और प्रशासन जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण तथा सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं।