निठारी कांड के प्रमुख आरोपी की संदिग्ध मौत। पीड़ित परिवारों के सवाल अब भी बरकरार
हरिद्वार। देश के सबसे चर्चित और रहस्यमयी आपराधिक मामलों में शामिल निठारी कांड का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। निठारी कांड के प्रमुख आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या करने की सूचना सामने आई है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में रह रहा था और चाय का खोखा चलाकर जीवनयापन कर रहा था।
सुरेंद्र कोली वही शख्स था, जिसका नाम 2006 के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड के साथ जुड़ा था। नोएडा के निठारी गांव स्थित डी-5 कोठी और उसके आसपास से बच्चों और युवतियों के मानव अवशेष मिलने के बाद यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला बन गया था।
कोली उस समय कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के यहां घरेलू नौकर के रूप में कार्यरत था। मामले की जांच के दौरान कोली पर अपहरण, दुष्कर्म, हत्या और शवों को ठिकाने लगाने जैसे गंभीर आरोप लगे।
विभिन्न मामलों में उसे मौत की सजा तक सुनाई गई और उसने करीब 19 वर्ष जेल में बिताए। हालांकि बाद के वर्षों में अदालतों ने जांच और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में उससे जुड़े 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में अंतिम लंबित मामले में भी उसे दोषमुक्त कर दिया।
अदालतों ने कहा कि केवल शक के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती और अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
निठारी कांड की शुरुआत 2005-06 में बच्चों और युवतियों के लगातार लापता होने की घटनाओं से हुई थी।
29 दिसंबर 2006 को डी-5 कोठी के पास नाले से मानव कंकाल और अवशेष मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई और कोली तथा मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए।
हालांकि अदालतों से बरी होने के बावजूद निठारी कांड का सबसे बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है। पीड़ित परिवार वर्षों से पूछते रहे हैं कि यदि कोली और पंढेर दोषी नहीं थे, तो उनके बच्चों और युवतियों की हत्या किसने की।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में माना था कि घटनाएं बेहद भयावह थीं, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य कानूनी कसौटी पर दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
अब सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत की सूचना के बाद लगभग दो दशक पुराना यह मामला फिर चर्चा में है। लेकिन निठारी कांड से जुड़े वे सवाल आज भी कायम हैं, जिनका जवाब पीड़ित परिवार और देश अब तक तलाश रहे हैं।


