जंगल में रात का ‘खेला’! ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की एंट्री से मचा बवाल
रिपोर्ट- दिलीप अरोरा
ऊधमसिंह नगर। तराई केंद्रीय वन प्रभाग की पीपलपड़ाव वन रेंज एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार मामला वन क्षेत्र में रात के समय कथित रूप से ओवरलोड और बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही से जुड़ा है।
स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे वन्यजीवों तथा मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में रात के समय पीपलपड़ाव रेंज से बड़ी संख्या में ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के गुजरने की घटनाएं सामने आई हैं। आरोप है कि ये वाहन निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए वन क्षेत्र से होकर निकाले गए।
वन एवं पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि रात्रि के समय वन्यजीव अपने प्राकृतिक विचरण के लिए बाहर निकलते हैं, ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही और शोर उनके व्यवहार और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
वन्यजीवों और लोगों की सुरक्षा पर उठे सवाल
वन क्षेत्र में सूर्यास्त के बाद आमतौर पर बाहरी व्यक्तियों और वाहनों की आवाजाही सीमित या प्रतिबंधित रहती है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों और मानव जीवन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
ऐसे में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के प्रवेश और निकासी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी वन्यजीव और वाहन या मानव के बीच कोई अप्रिय घटना घट जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती।
प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी
मामले को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार और वन विभाग वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि नियमों की अनदेखी की जाती है तो इससे संरक्षण संबंधी प्रयासों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। कुछ लोगों ने संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण की भी मांग उठाई है।
रात में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मौजूदगी को लेकर चर्चा
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन के समय कार्रवाई या चालान से बचने के लिए वन क्षेत्र के आसपास खड़ी रहती हैं और रात के समय आवाजाही करती हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग या प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
रेंजर ने उच्च अधिकारियों की ओर किया इशारा
मामले में जब संबंधित वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) से संपर्क किया गया तो उन्होंने विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस विषय में जानकारी और जवाब उच्च अधिकारियों द्वारा दिया जा सकता है। उन्होंने संबंधित प्रश्नों के लिए प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) से संपर्क करने की बात कही।
जांच और जवाबदेही की मांग
मामले को लेकर अब क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में नियमों के विपरीत रात के समय भारी वाहनों को वन क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी गई है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या सभी आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर अब लोगों की निगाहें वन विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

