SIR पर बढ़ा घमासान! ओवैसी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, आज जस्टिस लोकुर आयोग सुनेगा मतदाताओं का दर्द
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बिहार में SIR को वैध ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।
वहीं, दिल्ली में 15 अक्टूबर को पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाला स्वतंत्र आयोग SIR से प्रभावित मतदाताओं की शिकायतें सुनने के लिए पहली सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित करेगा।
बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा की मांग
असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को वैध ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा की मांग की है।
ओवैसी मूल मामले में पक्षकार नहीं थे, लेकिन उन्होंने मतदाता, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और AIMIM प्रमुख के रूप में याचिका दाखिल की है।
याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से संबंधित नई जानकारियों पर विचार करने और आधिकारिक रिकॉर्ड तलब करने का अनुरोध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के माध्यम से चुनाव आयोग की प्रक्रिया की वैधता बरकरार रखी थी।
अदालत ने माना था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की संवैधानिक आवश्यकता से जुड़ा है।
ओवैसी की समीक्षा याचिका में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका के अनुसार, *द इंडियन एक्सप्रेस* की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि लगभग 10 महीने की अवधि में करीब 14 फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना लिए गए।
उत्तर प्रदेश में 85,854 नाम हटाने से जुड़े फॉर्म का भी उल्लेख
याचिका में *द रिपोर्टर्स कलेक्टिव* की 9 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने कथित तौर पर 85,854 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ऐसे फॉर्म स्वतः तैयार किए, जिनमें नाम हटाने का कारण दर्ज नहीं था।
ओवैसी की याचिका में इसे प्रक्रिया की निष्पक्षता और कानूनी सुरक्षा उपायों के पालन से जुड़ा गंभीर सवाल बताया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग की आंतरिक फाइल टिप्पणियों, पत्राचार और निर्णय प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड सामने आने चाहिए, ताकि यह जांचा जा सके कि संबंधित फैसले कानून के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के बिहार SIR फैसले के पैरा 75 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि चुनाव आयोग को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कानून की सीमाओं के भीतर करना चाहिए।
ओवैसी ने अदालत से नई सामग्री पर विचार करने और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड मंगाने की मांग की है।
दिल्ली में आज SIR प्रभावित मतदाताओं की जनसुनवाई
दूसरी ओर, लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) की ओर से गठित स्वतंत्र आयोग 15 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहर भवन में पहली सार्वजनिक जनसुनवाई करेगा।
सुबह 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक होने वाली इस सुनवाई में SIR से प्रभावित मतदाताओं की गवाही सुनी जाएगी और उनकी शिकायतों व अनुभवों को औपचारिक रूप से दर्ज किया जाएगा।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाला यह आयोग चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता, कार्यप्रणाली और प्रभावों की जांच कर रहा है।
आयोग का उद्देश्य प्रभावित मतदाताओं की चिंताओं को सामने लाना और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा से जुड़े मुद्दों का परीक्षण करना है।
आयोग ने निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग को भी जनसुनवाई में शामिल होने का निमंत्रण देने का निर्णय लिया है।
इसके लिए आयोग के सचिवालय को ECI को औपचारिक सूचना भेजने और सुनवाई में शामिल होने के लिए वरिष्ठ अधिकारी नामित करने का अनुरोध करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिसंबर 2026 तक रिपोर्ट जारी करने का लक्ष्य
जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाले आयोग में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस ए.के. पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बदर दुर्रेज अहमद, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रेखा शर्मा और पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश शामिल हैं।
आयोग को वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अन्य वकीलों की टीम कानूनी सहायता दे रही है। आयोग ने अपनी जांच पूरी कर दिसंबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बिहार में SIR के खिलाफ पुनर्विचार याचिका और दिल्ली में प्रभावित मतदाताओं की जनसुनवाई के बीच मतदाता सूची की पारदर्शिता, पुनरीक्षण की प्रक्रिया और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
ओवैसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और आयोग की जनसुनवाई से सामने आने वाली शिकायतें इस बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।



