बड़ी खबर: इधर हरिद्वार में GST की चोट, उधर तंबाकू पर प्रतिबंध से करोड़ों के कारोबार को झटक

इधर हरिद्वार में GST की चोट, उधर तंबाकू पर प्रतिबंध से करोड़ों के कारोबार को झटक

देहरादून। उत्तराखंड में जीएसटी अनियमितताओं और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री के खिलाफ सरकारी कार्रवाई तेज हो गई है।

हरिद्वार के रानीपुर मोड़ स्थित एक नामी मिठाई के प्रतिष्ठान पर राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने छापेमारी कर अभिलेखों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की।

शुरुआती जांच में स्टॉक और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के आंकड़ों में करीब 30 लाख रुपये की विसंगति सामने आई है।

वहीं, राज्य सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला समेत संबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर 13 अक्टूबर 2026 से एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने बाजारों में जांच और छापेमारी शुरू कर दी है।

हरिद्वार में जीएसटी टीम की कार्रवाई, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जीएसटी चोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देशों के बाद राज्य कर विभाग की टीम ने हरिद्वार में कार्रवाई की।

आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर रानीपुर मोड़ स्थित एक प्रतिष्ठित मिठाई के प्रतिष्ठान पर छापेमारी की गई। टीम में विशेष अनुसंधान शाखा, सचल दल और ऑडिट इकाई के अधिकारी शामिल रहे।

जांच के दौरान प्रतिष्ठान के बिलों, स्टॉक और आईटीसी से संबंधित अभिलेखों में विसंगतियां मिलीं। अधिकारियों के मुताबिक, जिस अनुपात में इनपुट टैक्स क्रेडिट रिवर्स किया जाना चाहिए था, उसमें अंतर पाया गया।

पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का सही मिलान नहीं होने के कारण विभाग ने जीएसटी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं।

उपायुक्त जीएसटी देहरादून सुरेश कुमार ने बताया कि पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर करीब 30 लाख रुपये के टैक्स से संबंधित विसंगति का आकलन किया गया है। प्रतिष्ठान को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक टैक्स चोरी की पुष्टि नहीं हुई है और यह नियमित जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। विस्तृत जांच के बाद आईटीसी का आकलन बदल सकता है। यदि आईटीसी का गलत उपयोग पाया जाता है, तो नियमानुसार उसकी वसूली की जाएगी।

प्रतिष्ठान के स्वामी ने टीम को बताया कि वह अपने रिकॉर्ड डाउनलोड करने के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे। इसके बाद प्रतिष्ठान के पोर्टल और विभागीय डेटा का मिलान किया जाएगा।

उत्तराखंड में गुटखा-तंबाकू पर एक साल का प्रतिबंध, दुकानदारों के सामने स्टॉक की चुनौती

दूसरी ओर, उत्तराखंड में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा संबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल की रोक लागू कर दी गई है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के आयुक्त विनय शंकर पांडेय की ओर से जारी आदेश के तहत प्रतिबंध 13 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है। इसके बाद 14 अक्टूबर से विभाग ने प्रदेशभर में कार्रवाई शुरू कर दी।

प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(ए) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 के विनियम 2.3.4 के तहत लगाया गया है। इसके दायरे में केवल खुदरा दुकानें ही नहीं, बल्कि निर्माण इकाइयां, गोदाम, थोक विक्रेता और वितरण केंद्र भी शामिल हैं।

इस फैसले से छोटे किराना दुकानदारों और पान विक्रेताओं के सामने मौजूदा स्टॉक के प्रबंधन की समस्या खड़ी हो गई है। प्रतिबंध लागू होने के बाद संबंधित उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकती।

ऐसे में व्यापारी बचा हुआ स्टॉक वापस भेजने या उसके निस्तारण के लिए सरकार से मोहलत और स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग कर रहे हैं।

उत्तराखंड में वर्ष 2013, 2015 और 2019 में भी ऐसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इनकी बिक्री पर पूरी तरह लगाम लगाना चुनौती बना रहा है।

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई, एफडीए ने बाजारों में जांच तेज की

एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों के सेवन से कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

इसी को देखते हुए राज्य में एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंधित उत्पाद बाजारों में बिकते हुए नहीं मिलने चाहिए।

जग्गी के अनुसार, यदि कोई प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री या अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों और कारोबारियों से ऐसे उत्पादों को हटाने में सहयोग करने की अपील भी की।

तंबाकू उत्पादों से करीब 40 करोड़ रुपये के जीएसटी का अनुमान

तंबाकू आधारित उत्पादों पर प्रतिबंध का असर कारोबारियों के साथ-साथ सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन उत्पादों से राज्य को सालाना करीब 40 करोड़ रुपये का जीएसटी मिलता है।

इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये राज्य सरकार और इतनी ही राशि केंद्र सरकार के हिस्से में जाने का अनुमान है। ऐसे में प्रतिबंध से खुदरा कारोबारियों के अलावा थोक विक्रेताओं, वितरकों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अन्य कारोबारियों पर भी आर्थिक असर पड़ने की आशंका है।

कैंसर के खतरे को देखते हुए फैसले का स्वागत

तंबाकू प्रतिबंध को स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईसीएमआर के अध्ययन के हवाले से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में होंठ, जीभ और मुंह के कैंसर के मामलों में धूम्ररहित तंबाकू का सेवन एक प्रमुख जोखिम कारक है।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दौलत सिंह के अनुसार, अस्पताल में कैंसर का इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों में करीब 60 से 65 प्रतिशत किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं।

इनमें लगभग 35 प्रतिशत मरीजों में मुंह का कैंसर पाया गया है। उन्होंने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए लोगों को तंबाकू के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई।

व्यापारियों ने किया समर्थन, स्टॉक के लिए मोहलत की मांग

देहरादून व्यापार मंडल की महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष मधु गुप्ता ने कहा कि जनस्वास्थ्य के लिहाज से सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन इससे दुकानदारों की आय और रोजी-रोटी पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की कि जिन व्यापारियों के पास प्रतिबंध लागू होने से पहले खरीदा गया स्टॉक मौजूद है, उन्हें उसके प्रबंधन के लिए उचित मोहलत दी जाए।

वहीं, आम लोगों ने भी तंबाकू प्रतिबंध का समर्थन किया। लोगों का कहना है कि गुटखा और तंबाकू के सेवन से कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, इसलिए ऐसे उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक जरूरी है। कुछ लोगों ने शराब की बिक्री पर भी नियंत्रण लगाने की मांग उठाई।

एक तरफ जीएसटी अनियमितताओं की जांच, दूसरी तरफ जनस्वास्थ्य के लिए प्रतिबंध

उत्तराखंड में इन दोनों कार्रवाइयों के जरिए सरकार की निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था सक्रिय नजर आ रही है।

हरिद्वार में जीएसटी टीम की जांच के दौरान सामने आई करीब 30 लाख रुपये की विसंगति पर अभी अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है, जबकि तंबाकू और निकोटीन युक्त प्रतिबंधित उत्पादों के मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और प्रतिबंध को प्रदेशभर में कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।