क्राइम अपडेट: सौरभ हत्याकांड में मृत्युदंड, शराब तस्करी का खुलासा, इंस्पेक्टर के निलंबन की संस्तुति, और….

सौरभ हत्याकांड में मृत्युदंड, शराब तस्करी का खुलासा, इंस्पेक्टर के निलंबन की संस्तुति, और….

  • मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, ऋषिकेश में कैंटीन की शराब बताकर बेचने की कोशिश नाकाम, वहीं गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी को लेकर इंस्पेक्टर विक्रम राठौड़ के निलंबन की संस्तुति

देहरादून। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े तीन प्रमुख मामलों में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है।

वहीं, ऋषिकेश में आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने डिफेंस कैंटीन और चंडीगढ़ में बिक्री के लेबल लगी शराब की 10 पेटी बरामद कर मेरठ निवासी आरोपी को गिरफ्तार किया है।

दूसरी ओर, गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी के तरीके पर उठे सवालों के बाद उधम सिंह नगर के इंस्पेक्टर विक्रम राठौड़ के निलंबन की संस्तुति आईजी कुमाऊं को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड

मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सौरभ की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी। आरोप था कि मुस्कान और साहिल ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया और बाद में शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट भरकर छिपाने की कोशिश की।

18 मार्च 2025 को सौरभ का भाई राहुल घर पहुंचा, जहां परिस्थितियों पर संदेह होने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। जांच के दौरान नीले ड्रम से शव के अवशेष बरामद हुए।

मुकदमे की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट, हथियारों की बरामदगी, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान सहित कई साक्ष्य पेश किए। अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान कराए थे। अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी करार दिया था।

सजा सुनाने से पहले अदालत ने दोनों का पक्ष सुना। रिपोर्ट के अनुसार, मुस्कान ने अपनी छोटी बेटियों का ख्याल रखने की बात कही, जबकि साहिल ने कोई जवाब नहीं दिया। बचाव पक्ष ने कम सजा देने की मांग की थी, जबकि अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड की मांग रखी थी।

ऋषिकेश में कैंटीन की शराब बताकर बिक्री की तैयारी, 10 पेटी बरामद

गढ़ी श्यामपुर के पास आबकारी विभाग की ऋषिकेश टीम और जनपदीय प्रवर्तन दल देहरादून ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दिल्ली नंबर की हुंडई क्रेटा कार से 10 पेटी शराब बरामद की।

इसमें रॉयल स्टैग व्हिस्की की 100 बोतल और बडवाइजर बीयर की 24 बोतल शामिल हैं। व्हिस्की की बोतलों पर ‘फॉर सेल डिफेंस पर्सनल ओनली’ और बीयर पर ‘फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली’ लिखा था।

आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान कार चालक निशांत शर्मा निवासी मोदीपुरम, मेरठ को गिरफ्तार किया गया। विभाग की प्रारंभिक जांच में बोतलों पर लगे लेबल और होलोग्राम प्रथम दृष्टया नकली पाए गए हैं।

पूछताछ में आरोपी ने शराब मेरठ से लाने और डिफेंस के लेबल लगाने की बात बताई, ताकि आम लोगों को शराब कैंटीन की लगे। आरोप है कि शराब की खेप को शादी और पार्टी के सीजन में खपाने की तैयारी थी।

आबकारी विभाग ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 63/72 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। शराब की वास्तविक आपूर्ति, लेबल तैयार करने और बिक्री नेटवर्क की जांच की जा रही है।

योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी पर सवाल, इंस्पेक्टर के निलंबन की संस्तुति

उधम सिंह नगर जिले में गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी के तरीके को लेकर विवादों में आए इंस्पेक्टर विक्रम राठौड़ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

एसएसपी अजय गणपति कुंभार ने इंस्पेक्टर के निलंबन की संस्तुति आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती को भेजे जाने की पुष्टि की है।

मामले की जांच एसपी क्राइम अनुष्का बडोला को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है, हालांकि उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें जांच के आदेश से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले हैं।

मामला 8 जुलाई 2026 का है, जब तत्कालीन आईटीआई कोतवाली प्रभारी विक्रम राठौड़ ने काशीपुर के चैती मेला मार्ग क्षेत्र में एक खंडहर के पास से योगेश भदौड़ा को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था।

प्रारंभिक जांच में आरोप लगे कि 112 हेल्पलाइन पर सूचना दिलवाने के बाद स्थानीय पुलिस के माध्यम से गिरफ्तारी कराई गई, ताकि गैंगस्टर को यूपी एसटीएफ के हाथों पकड़े जाने से बचाया जा सके। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

गिरफ्तारी प्रकरण के बाद विक्रम राठौड़ को लाइन हाजिर किया गया था और बाद में उनका तबादला पिथौरागढ़ कर दिया गया।

अब निलंबन की संस्तुति पर आईजी के निर्णय और जांच के औपचारिक आदेश का इंतजार है। विस्तृत जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम और संबंधित अधिकारी की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।