विरासत में बच्चों ने दिखाई हुनर की चमक, मुजफ्फर रहमान की ताल वाद्य कचहरी ने बांधा समां
देहरादून। विरासत महोत्सव-2026 के बारहवें दिन मंगलवार को जहां स्कूली बच्चों ने हस्तशिल्प कार्यशाला में अपनी रचनात्मकता और हुनर का प्रदर्शन किया, वहीं शाम को मशहूर कलाकार मुजफ्फर रहमान और उनके समूह की ताल वाद्य कचहरी की प्रस्तुति ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
पारंपरिक कला, शिल्पकारी और संगीत के अनूठे संगम ने महोत्सव में मौजूद दर्शकों और अतिथियों को खासा प्रभावित किया।
महोत्सव के तहत लिटिल माइंड स्कूल के 22 विद्यार्थियों के लिए मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में हस्तशिल्प कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बच्चों को टेराकोटा और टाई-एंड-डाई कला की बारीकियों से परिचित कराया गया।
विद्यार्थियों ने इन पारंपरिक शिल्प विधाओं को समझने के साथ विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया और अपनी कल्पनाशीलता को कलाकृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। बच्चों की बनाई कलाकृतियों को दर्शकों और महोत्सव में मौजूद अतिथियों ने खूब सराहा।
कार्यशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को पारंपरिक हस्तकलाओं से जोड़ना और उन्हें स्वयं कलाकृतियां तैयार करने का अवसर प्रदान करना रहा। आयोजकों के अनुसार, विरासत साधना के तहत अब तक हजारों स्कूली बच्चे उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन कर चुके हैं।
वहीं, मंगलवार की सांस्कृतिक संध्या में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुके कलाकार मुजफ्फर रहमान और उनके आठ सदस्यीय समूह ने ताल वाद्य कचहरी की शानदार प्रस्तुति दी।
विभिन्न वाद्ययंत्रों की मधुर और लयबद्ध संगति ने श्रोताओं को संगीत के अनूठे अनुभव से रूबरू कराया। प्रस्तुति में मुजफ्फर रहमान, अयान हुसैन और रमजान हुसैन ने तबले पर, ऐश्वर्या आर्य ने पखावज पर, सरफराज ने ढोलक पर, रमेश मीना ने हारमोनियम पर, इरफान ने सितार पर और जाकिर हुसैन ने सारंगी पर संगत की।
कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध राजस्थानी मांड ‘केसरिया बालम’ से हुई। इसके बाद कलाकारों ने विभिन्न वाद्ययंत्रों के माध्यम से सुर और ताल का शानदार समन्वय प्रस्तुत किया।
ठुमरी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संगीत की इस मनमोहक प्रस्तुति ने सांस्कृतिक संध्या में समां बांध दिया और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।



