बड़ी खबर: किच्छा में मतपेटियों को लेकर हंगामा, देहरादून में 10 सूत्रीय मांगों पर गरजे ग्राम प्रधान

किच्छा में मतपेटियों को लेकर हंगामा, देहरादून में 10 सूत्रीय मांगों पर गरजे ग्राम प्रधान

उत्तराखंड। प्रदेश में मंगलवार को एक ओर किच्छा नगर पालिका चुनाव के बाद स्ट्रांग रूम के बाहर देर रात हंगामा देखने को मिला, तो दूसरी ओर देहरादून में ग्राम प्रधान अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विकास भवन में प्रदर्शन करते नजर आए।

किच्छा में कांग्रेस प्रत्याशी ने छह मतपेटियों को बदले जाने की आशंका जताते हुए प्रशासन से जांच की मांग की, जबकि देहरादून में ग्राम प्रधानों ने मानदेय बढ़ाने से लेकर विकास निधि उपलब्ध कराने तक की मांग उठाई।

किच्छा में स्ट्रांग रूम के बाहर देर रात हंगामा

नगर पालिका चुनाव का मतदान समाप्त होने के बाद मंगलवार देर रात किच्छा में स्ट्रांग रूम के बाहर माहौल गरमा गया। कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष पद के प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने छह मतपेटियों को लेकर सवाल उठाए और उन्हें बदले जाने की आशंका जताई।

इस दौरान पुलिस और प्रत्याशी के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस द्वारा उन्हें स्ट्रांग रूम परिसर से बाहर ले जाने के बाद समर्थकों में भी नाराजगी दिखाई दी।

राजेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जिन छह मतपेटियों को लेकर वह सवाल उठा रहे हैं, उनमें कथित तौर पर ‘जग्गू’ नाम के सामने दोहरी मोहर लगाए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेने और स्ट्रांग रूम में रखी मतपेटियों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की मांग की।

कांग्रेस प्रत्याशी ने कहा कि प्रत्याशी के हस्ताक्षर के बिना मतपेटियों को पूरी तरह सुरक्षित मानने को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने स्ट्रांग रूम में मतपेटियों को रखे जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से भी मामले का संज्ञान लेने की अपील की।

पूर्व विधायक भी पहुंचे स्ट्रांग रूम

देर रात रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने छह मतपेटियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। ठुकराल ने दावा किया कि तत्काल मतगणना कराई जाए तो कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह की जीत होगी।

हालांकि, यह राजनीतिक पक्ष की ओर से किया गया दावा है और मतगणना के परिणाम के बिना इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मतदान के बाद राजेश प्रताप सिंह और उनके समर्थक स्ट्रांग रूम के बाहर जमा हो गए थे। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद नोकझोंक हुई। रात करीब 11 से 12 बजे तक मौके पर गहमागहमी बनी रही।

इससे पहले मतदान और मतपेटियां स्ट्रांग रूम में जमा कराने के दौरान भी किच्छा में विवाद की स्थिति बनी थी। कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़, भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और समर्थकों के बीच नोकझोंक की खबरें सामने आई थीं।

पुलिस को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा था। किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के संदीप अरोड़ा और कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह के बीच मुकाबला है।

कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से लगाए गए मतपेटियां बदलने और धांधली की आशंका के आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं आया है।

देहरादून में ग्राम प्रधानों ने उठाई 10 सूत्रीय मांगें: वहीं देहरादून में जिला ग्राम प्रधान संगठन ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विकास भवन में प्रदर्शन किया। ग्राम प्रधानों ने प्रदेश सरकार से मांगों का जल्द निराकरण करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

ग्राम प्रधानों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम मासिक मानदेय 20 हजार रुपये करना और विधायकों एवं सांसदों की तरह ग्राम प्रधानों को भी विकास निधि उपलब्ध कराना शामिल है।

संगठन का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान ग्राम प्रधान सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं, इसलिए उनके पास तत्काल राहत एवं विकास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन होने चाहिए।

प्रधानों ने वीबी-जी राम जी में श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति की बाध्यता समाप्त कर ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने तथा अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 600 रुपये और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की।

इसके साथ ही ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य और केंद्रीय वित्त की धनराशि बढ़ाने, जिला योजना में ग्राम प्रधानों की भागीदारी सुनिश्चित करने और पंचायत राज एक्ट के तहत पारित सभी 29 विभागों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग की गई।

संगठन ने ग्राम पंचायतों में आकस्मिक आपदा राहत के लिए अलग बजट की व्यवस्था, स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध पूरा करने, ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कराने और प्रधानमंत्री आवास योजना की प्राथमिकता सूची में पात्र लाभार्थियों के नाम शामिल करने की मांग भी रखी।

प्रदेश संगठन महामंत्री सुरेंद्र चौहान ने कहा कि संगठन पिछले तीन-चार महीने से मांगों को लेकर प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि आगे पंचायत राज निदेशालय में धरना दिया जाएगा।

इस तरह मंगलवार को प्रदेश में एक तरफ स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया को लेकर सवाल और आरोप सुर्खियों में रहे, वहीं दूसरी तरफ गांवों की सरकार चलाने वाले ग्राम प्रधान अपनी वित्तीय और प्रशासनिक मांगों को लेकर सड़क पर उतरे।

दोनों ही मामलों में संबंधित पक्षों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और अपनी मांगों पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।