किच्छा-सिरौलीकलां चुनाव पर अधिसूचना, ज्यूलिकोट पानी मामले में कार्रवाई रिपोर्ट तलब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव तथा ज्यूलिकोट दूषित पेयजल मामले में सुनवाई हुई।
किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराने के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
हालांकि मतदान के बाद होने वाली मतगणना को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा गया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को निर्धारित की है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि कई बार सुनवाई होने के बावजूद सरकार किच्छा और सिरौलीकलां में चुनाव नहीं करा रही थी, जबकि प्रदेश के अन्य निकायों में चुनाव करीब एक वर्ष पहले हो चुके हैं।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक चुनाव नहीं होने के कारण नगर पालिका से जुड़े विकास कार्य और आम जनता के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर दोनों नगर पालिकाओं के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए जल्द चुनाव कराने की मांग की।
मामले में किच्छा निवासी नईमुल हुसैन सहित अन्य लोगों ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार ने प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किच्छा में चुनाव टालना चाहती है। याचिका में आरक्षण आवंटन नियमावली का हवाला देते हुए कहा गया कि अध्यक्ष पदों की कुल संख्या के आधार पर रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए था, जबकि सरकार ने 43 पालिका अध्यक्ष पदों के आधार पर रोस्टर तैयार किया।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, पूर्व में सरकार ने किच्छा नगर पालिका में कुछ वार्ड और गांव शामिल किए थे, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। बाद में इन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल किया गया।
इसके बाद किच्छा में चुनाव को लेकर विवाद सामने आया।
न्यायालय के पूर्व आदेश के बाद नगर पालिका अध्यक्ष पद का आरक्षण भी तय कर दिया गया, लेकिन चुनाव नहीं कराया गया। इसी तरह नवगठित सिरौलीकलां नगर पालिका में भी चुनाव नहीं कराया गया। अब राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद मामले में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
ज्यूलिकोट दूषित पानी मामले में 29 सितंबर को फिर सुनवाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट में ज्यूलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति से जुड़े पीआईएल मामले में भी सुनवाई हुई।
खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय करते हुए जिलाधिकारी से अब तक न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
साथ ही मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी भी अगली सुनवाई में देने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले कुछ महीनों से नैनीताल के निचले इलाकों में सीवर और जल स्रोत का पानी मिश्रित होने की शिकायत सामने आई थी।
इसके बाद गांजा, तल्ला छिंड़ा, मल्ला छिंड़ा, वीरभट्टी, ज्यूलिकोट और खुर्पाताल समेत कई क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या सामने आई। बताया गया कि 500 से अधिक लोग पीलिया और डायरिया समेत विभिन्न जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए।
अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता रवि बिष्ट ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में हाईकोर्ट के समक्ष रखा है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीएमओ रश्मि पंत, एसडीएम नवाजिश खलीक, अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई समेत जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने सरकारी अधिवक्ताओं से मॉनिटरिंग कमेटी की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि अगली तारीख पर जिलाधिकारी अब तक न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करें। साथ ही मॉनिटरिंग कमेटी के निर्णयों से भी अदालत को अवगत कराया जाए।
उप महाधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र में पानी की आपूर्ति की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और परिस्थितियां नियंत्रण में हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों की संख्या में भी कमी आई है तथा मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक बुधवार को प्रस्तावित है।
सीएससी पूरन सिंह रावत ने अदालत को बताया कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान के तीन और जल निगम के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मामले में मुख्य जिम्मेदार अधिकारी जल संस्थान के अधिशासी अभियंता हैं। याचिकाकर्ता ने दूषित पानी में मिलावट से संबंधित तस्वीरें भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कीं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता आदित्य प्रताप ने अदालत को बताया कि नैनीताल शहर से 17 पानी के सैंपल लिए गए थे और उनकी रिपोर्ट में फिलहाल राहत की स्थिति सामने आई है। उन्होंने बताया कि खुर्पाताल क्षेत्र से भी मंगलवार को पेयजल के सैंपल लिए जाएंगे।


