राजनीति: उत्तराखंड में 2027 की बिसात! नेताओं के बयान, टिकट की दावेदारी और भाजपा की नई रणनीति

उत्तराखंड में 2027 की बिसात! नेताओं के बयान, टिकट की दावेदारी और भाजपा की नई रणनीति

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ दूर हों, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल तेज होने लगी है। कहीं कांग्रेस से करीबी रखने वाले नेता भाजपा विधायक की खुले मंच से तारीफ कर रहे हैं।

कहीं भाजपा नेता टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो कहीं अग्निवीरों के रोजगार को लेकर सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है। दूसरी ओर रामलीला मैदान के शुद्धिकरण विवाद और भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता टोली के विस्तार ने भी राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दिया है।

रामनगर में सरस मेले के मंच से पूर्व ब्लॉक प्रमुख और वर्तमान जेष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी माने जाने वाले संजय नेगी ने भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों से रामनगर की जनता उन्हें विधायक चुन रही है और यदि कोई जनप्रतिनिधि केवल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाकर राजनीति करता तो वह लंबे समय तक जनता का विश्वास नहीं जीत सकता। उन्होंने यहां तक कहा कि दीवान सिंह बिष्ट आगे भी विधायक बनेंगे।

संजय नेगी के इस बयान को 2027 से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में उनकी भूमिका और पार्टी में संभावित एंट्री को लेकर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं।

ऐसे में भाजपा विधायक की सार्वजनिक मंच से प्रशंसा ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या रामनगर में कोई नया राजनीतिक समीकरण आकार ले रहा है या यह केवल एक मंचीय बयान था।

वहीं हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट पर भाजपा में टिकट की दावेदारी तेज होने लगी है। भाजपा किसान मोर्चा के जिला मंत्री शिवा चौहान सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और स्थानीय व युवा चेहरे को मौका देने की मांग करते हुए अपनी दावेदारी पेश की। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को बायोडाटा सौंपते हुए कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को समझने वाले स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट दिया जाना चाहिए।

हरिद्वार ग्रामीण सीट को प्रदेश की अहम और चर्चित विधानसभा सीटों में माना जाता है। पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनुपमा रावत ने भाजपा के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद को हराया था। अब 2027 के चुनाव से पहले इस सीट पर भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं।

इधर, अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार को लेकर उत्तराखंड सरकार की नई पहल भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सरकार अग्निवीरों के लिए समर्पित रोजगार सेल बनाने की तैयारी कर रही है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अग्निवीरों को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार, स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण, प्रमाणन और विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की योजना है।
इस सेल के माध्यम से सेना, अर्धसैनिक बलों, सरकारी विभागों, पीएसयू और निजी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करने की बात कही गई है।

अग्निवीरों के कौशल, अनुभव और रोजगार संबंधी जानकारी के लिए डिजिटल पोर्टल विकसित करने की भी योजना है। उत्तराखंड सरकार पहले ही सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था कर चुकी है। अब इस नई पहल को रोजगार के व्यापक मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के एक बयान ने भी सियासत को गर्मा दिया है। मसूरी में उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण को सही ठहराया।

उन्होंने कहा कि यदि आयोजन के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया गया तो इसमें गलत क्या है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक रंग देने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने विपक्ष पर समाज को बांटने वाले मुद्दे उठाने का आरोप लगाया।

इस बीच भाजपा ने प्रदेश स्तर पर अपनी मीडिया रणनीति को भी मजबूत किया है। पार्टी ने प्रदेश प्रवक्ता टोली का विस्तार करते हुए आठ नए नेताओं को जिम्मेदारी दी है। इनमें रविंद्र जुगरान, राजेश शुक्ला, सुरेश तिवारी, शादाब शम्स, अनुकृति गुसाईं, विश्वजीत नेगी, सत्यवीर चौहान और मनोज जखमोला शामिल हैं।

इन नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व देते हुए पार्टी की नीतियों, सरकार के फैसलों और राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा का पक्ष मीडिया के सामने रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। नेताओं के बदलते तेवर, टिकट की दावेदारियां, संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक मुद्दों पर बढ़ती बयानबाजी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने वाली है।