मसूरी में चट्टान गिरी, कॉर्बेट में पर्यटक फंसे, SDRF की मुस्तैदी से कांवड़िए बचे और धराली आपदा का दर्द….
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और कांवड़ यात्रा के बीच बुधवार को कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आईं। मसूरी में भूस्खलन से सरकारी आवास क्षतिग्रस्त हो गया, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में उफनते नाले में पर्यटक फंस गए, हरिद्वार में एसडीआरएफ ने कांवड़ियों की जान बचाई और पुलिस ने बिछड़े परिवारों को मिलाया।
वहीं, उत्तरकाशी के धराली में पिछले वर्ष आई विनाशकारी आपदा की पहली बरसी पर दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मसूरी स्थित एसडीएम कार्यालय परिसर में बुधवार सुबह पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सरकारी आवास पर गिर गया। भारी चट्टान दीवार तोड़ते हुए कमरे तक पहुंच गई। हादसे के समय कर्मचारी गोविंद सिंह नेगी, उनकी पत्नी और छोटा बच्चा कमरे में मौजूद थे।
पत्नी को मामूली चोट आई, जबकि बड़ा हादसा टल गया। कर्मचारियों ने जर्जर सरकारी आवासों के पुनर्निर्माण, पहाड़ी के वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और सुरक्षित वैकल्पिक आवास की मांग की है।
उधर, हरिद्वार कांवड़ मेले में एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। आईजी एसडीआरएफ योगेंद्र सिंह रावत के अनुसार अब तक गंगा में डूब रहे 22 कांवड़ियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
हरिद्वार, टिहरी और पौड़ी में कुल नौ टीमें तैनात हैं, जिनमें हरिद्वार के कांगड़ा घाट सहित संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार पुलिस ने भी मानवता का परिचय देते हुए दो अलग-अलग मामलों में बिछड़े परिवारों को मिलाया। पुलिस ने एक पांच वर्षीय बच्ची को उसकी मां से मिलाया, जबकि चार दिनों से भटक रही मूक-बधिर महिला को भी उसके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाया।
वहीं, लगातार बारिश का असर विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी देखने को मिला। खारा गेट के पास उफनते बरसाती नाले में जंगल सफारी से लौट रही पांच जिप्सियां फंस गईं, जिनमें तीन विदेशी नागरिकों समेत 20 पर्यटक सवार थे।
वन विभाग ने करीब तीन घंटे के रेस्क्यू अभियान के बाद सभी पर्यटकों, गाइड और चालकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। एहतियात के तौर पर ढेला और झिरना पर्यटन जोन की बुधवार सुबह की सफारी भी स्थगित कर दी गई।
इधर, उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड आपदा की पहली बरसी पर ग्रामीणों ने 70 दिवंगतों की स्मृति में पाठ-पूजा और 101 पौधों का रोपण किया।
प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास कार्य शीघ्र पूरा करने की मांग दोहराई, जबकि प्रशासन ने बताया कि अधिकांश पुनर्वास मामलों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
लगातार बारिश और संवेदनशील मौसम के बीच ये घटनाएं एक बार फिर उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
वहीं, कांवड़ मेले में राहत एवं बचाव एजेंसियों और पुलिस की सक्रियता ने कई संभावित हादसों को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


