अश्लील वीडियो पोस्ट करने के आरोप में पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की मांग, शिकायत दर्ज
हल्द्वानी। समाजसेवी एवं “अंतिम संस्कार ग्रुप” के एडमिन हेमंत सिंह गौनिया ने व्हाट्सएप ग्रुप में कथित रूप से अश्लील एवं आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने वाले एक पुलिसकर्मी के खिलाफ भवाली थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए एफआईआर की मांग की है।
शिकायत रविवार को ईमेल के माध्यम से भेजी गई, जबकि मूल शिकायती पत्र स्पीड पोस्ट/कोरियर से भी प्रेषित किया गया है।
शिकायत के अनुसार, “अंतिम संस्कार ग्रुप” समाजसेवा के उद्देश्य से संचालित किया जाता है, जहां पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में लावारिस और असहाय मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया जाता है। हेमंत सिंह गौनिया का दावा है कि पिछले दो वर्षों में ग्रुप के माध्यम से 244 से अधिक अंतिम संस्कार कराए जा चुके हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 5 जुलाई 2026 को ग्रुप के एक सदस्य, जिसने स्वयं को पुलिसकर्मी बताया, ने ग्रुप में कथित रूप से अश्लील एवं आपत्तिजनक वीडियो साझा किया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि वीडियो में महिला और गौमाता से संबंधित आपत्तिजनक दृश्य थे, जिससे ग्रुप के सदस्यों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुईं।
हेमंत सिंह गौनिया का आरोप है कि वीडियो हटाने और कारण पूछने पर संबंधित व्यक्ति ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, धमकी दी और बाद में अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया।
उनका कहना है कि इस प्रकार का आचरण एक पुलिसकर्मी की गरिमा और सेवा नियमों के विपरीत है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि ग्रुप एडमिन होने के नाते अश्लील या कानून-विरुद्ध सामग्री का विरोध करना उनकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। इसी कारण उन्होंने घटना के दिन ही पुलिस को शिकायत भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
शिकायती पत्र में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मोबाइल की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराने, विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 एवं आवश्यकता होने पर धारा 67A, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों तथा उत्तराखंड पुलिस सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।
हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि यदि मामले में समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो वह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, उत्तराखंड पुलिस शिकायत प्राधिकरण और सक्षम न्यायालय का रुख करेंगे।
हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से शिकायत पर किसी कार्रवाई या आरोपों की पुष्टि संबंधी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

