सावन की आस्था और बारिश की चुनौती। कांवड़ यात्रा शुरू, केदारनाथ यात्रा तीसरे दिन भी ठप
देहरादून। सावन महीने के शुभारंभ के साथ उत्तराखंड में एक ओर करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है, तो दूसरी ओर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने केदारनाथ यात्रा पर ब्रेक लगा दिया है।
हरिद्वार में गुरुवार से कांवड़ मेले का विधिवत आगाज हो गया, जबकि रुद्रप्रयाग में लगातार तीसरे दिन भी केदारनाथ धाम की यात्रा बंद रही।
हरिद्वार में इस बार करीब 5 करोड़ कांवड़ियों के पहुंचने का अनुमान है। इसे देखते हुए पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टर में विभाजित किया गया है।
सुरक्षा के लिए 6000 पुलिसकर्मी, 13 कंपनियां पैरामिलिट्री फोर्स, पीएसी, डॉग स्क्वॉयड और बम निरोधक दस्ते तैनात किए गए हैं।
हरकी पैड़ी पर गंगाजल भरने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है। सरकार ने पेयजल, शौचालय, पार्किंग और ट्रैफिक की विशेष व्यवस्था की है, जबकि हरिद्वार के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 11 अगस्त तक अवकाश घोषित कर ऑनलाइन पढ़ाई के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर शिवभक्त को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना है। वहीं जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कांवड़ियों से नशामुक्त यात्रा करने और डीजे व भड़काऊ गतिविधियों से बचने की अपील की है। पुलिस ने भी सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
इस बार कांवड़ यात्रा में श्रद्धा के अनोखे रंग भी देखने को मिले। दिल्ली से आए शिवभक्त दीपांशु नोटों से सजी विशेष कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचे, जबकि उत्तर प्रदेश के बागपत से आए दो भाइयों ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर करीब 200 किलोमीटर की यात्रा शुरू की, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
उधर, लगातार बारिश ने चारधाम यात्रा को प्रभावित कर दिया है। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग और सोनप्रयाग-गौरीकुंड मोटर मार्ग पर भारी भूस्खलन और बोल्डर गिरने के कारण प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा लगातार तीसरे दिन भी स्थगित रखी है।
गौरीकुंड के पास मलबा पैदल मार्ग पर आ गया है, जबकि छोड़ी और मुंकटिया क्षेत्र में लगातार पत्थर गिर रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में ही रोका गया है।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने श्रद्धालुओं से मौसम सामान्य होने तक धैर्य बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। बदरी-केदार मंदिर समिति ने भी यात्रियों से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा पर निकलने की सलाह दी है।
एक ओर हरिद्वार में ‘बोल बम’ के जयघोष के बीच आस्था का महासागर उमड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश ने बाबा केदार के दर्शन की राह फिलहाल रोक दी है। ऐसे में उत्तराखंड में सावन इस बार श्रद्धा और प्राकृतिक चुनौती, दोनों का साक्षी बन रहा है।


