सुप्रीम कोर्ट की सख्ती। AIIMS निदेशक को अवमानना नोटिस, DNA टेस्ट में देरी पर मांगा जवाब
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में डीएनए परीक्षण कराने में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन को अवमानना नोटिस जारी किया है।
शीर्ष अदालत ने उन्हें 7 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि अदालत के आदेश के बावजूद डीएनए परीक्षण समय पर क्यों नहीं कराया गया।
मामले की सुनवाई कर रही पीठ, जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन शामिल हैं, ने पहले AIIMS प्रशासन से देरी के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा था।
संस्थान की ओर से बताया गया कि डीएनए परीक्षण के प्रभारी अधिकारी के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण जांच समय पर नहीं हो सकी।
सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि पूर्व निदेशक पद छोड़ चुके हैं और उनकी ओर से एक उप सचिव को हलफनामा दाखिल करने के लिए अधिकृत किया गया है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि जब अदालत ने निदेशक से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगा है, तो वह अपनी जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंप सकते।
अदालत ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि वर्तमान निदेशक केवल कार्यवाहक हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को, चाहे वह स्थायी हो या कार्यवाहक, अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही होगा। अदालत ने इस स्थिति को “आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला” बताया।
हालांकि, मामले में डीएनए परीक्षण अब पूरा हो चुका है। रिपोर्ट में बच्चे का डीएनए संबंधित पक्षों से मेल खाता पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह डीएनए रिपोर्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत करे, जहां वैवाहिक विवाद से जुड़ा मूल मामला विचाराधीन है।
यह मामला न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और सार्वजनिक संस्थानों की जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को दर्शाता है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायिक निर्देशों की अनदेखी या देरी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।


