बिग ब्रेकिंग: RTI में वेबसाइट का हवाला देना पड़ा भारी! DGFT के खिलाफ पहली अपील

RTI में वेबसाइट का हवाला देना पड़ा भारी! DGFT के खिलाफ पहली अपील

दिल्ली। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत दायर एक अहम मामले में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) के जवाब पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (FAA) के समक्ष विस्तृत प्रथम अपील दायर कर आरोप लगाया है कि विभाग ने अधिनियम की भावना और प्रावधानों के अनुरूप सूचना उपलब्ध नहीं कराई तथा केवल वेबसाइटों का हवाला देकर अपने वैधानिक दायित्व से बचने का प्रयास किया।

अपील के अनुसार, आरटीआई आवेदन में वर्ष 2015 से वर्तमान तक भारत में सोना, चांदी, हीरा तथा अन्य बहुमूल्य धातुओं एवं रत्नों के आयात-निर्यात, बिक्री, सरकारी राजस्व, कर, ऑडिट, गुणवत्ता परीक्षण, अभिलेखों और 16-अंकीय ITC/HS कोड से संबंधित विस्तृत जानकारी के साथ उपलब्ध अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।

हालांकि, 21 जुलाई 2026 को भेजे गए उत्तर में केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने अधिकांश प्रश्नों के जवाब में केवल विभिन्न वेबसाइटों के लिंक उपलब्ध कराए और शेष बिंदुओं पर यह कहा कि संबंधित सांख्यिकी प्रभाग के पास सूचना उपलब्ध नहीं है। अपीलकर्ता का आरोप है कि उत्तर न तो प्रश्नवार (Point-wise) है और न ही आरटीआई अधिनियम के अनुरूप।

प्रथम अपील में यह भी कहा गया है कि विभाग ने उत्तर भेजने के लिए पत्र तैयार किया, टाइप कराया और डाक से प्रेषित किया, लेकिन उसी के साथ मूल आरटीआई आवेदन की प्रति संलग्न नहीं की।

अपीलकर्ता का कहना है कि यदि आवेदन की प्रति संलग्न होती तो स्पष्ट रहता कि किस प्रश्न के उत्तर में कौन-सी जानकारी दी गई है, जिससे अनावश्यक भ्रम की स्थिति नहीं बनती।

अपील में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(एफ), 2(जे), 6(1), 7(1), 7(8), 19(1) और 19(8) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराना लोक सूचना अधिकारी का वैधानिक दायित्व है।

केवल वेबसाइट का लिंक देना, जबकि प्रमाणित अभिलेख मांगे गए हों, अधिनियम के अनुरूप सूचना उपलब्ध कराना नहीं माना जा सकता।

अपीलकर्ता ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी से मांग की है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी से यह स्पष्ट कराया जाए कि प्रश्नवार उत्तर क्यों नहीं दिया गया, मूल आरटीआई आवेदन की प्रति उत्तर के साथ क्यों संलग्न नहीं की गई और वेबसाइटों का हवाला देकर सूचना उपलब्ध कराने का प्रयास क्यों किया गया।

साथ ही अपील में यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि लोक सूचना अधिकारी ने बिना उचित कारण अधूरी या भ्रामक सूचना दी अथवा आरटीआई अधिनियम का उल्लंघन किया है, तो उनके विरुद्ध धारा 20 के तहत नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

अपीलकर्ता ने यह भी मांग की है कि चूंकि सूचना अधिनियम के अनुरूप उपलब्ध नहीं कराई गई, इसलिए अब समस्त उपलब्ध सूचना निःशुल्क (Free of Cost) प्रमाणित प्रतियों सहित उपलब्ध कराई जाए तथा प्रत्येक बिंदु का स्पष्ट प्रश्नवार उत्तर दिया जाए।

इसके अलावा, उत्तराखण्ड निवासी होने और मामला नई दिल्ली स्थित भारत सरकार के कार्यालय से संबंधित होने के कारण अपीलकर्ता ने प्रथम अपील की सुनवाई दूरभाष (Telephonic Hearing) अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से कराने का अनुरोध किया है, ताकि बिना अनावश्यक यात्रा के प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा जा सके।

अब इस मामले में निगाहें महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय पर टिकी हैं।

यदि प्रथम अपील स्वीकार की जाती है, तो विभाग को उपलब्ध अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्रश्नवार उपलब्ध कराने के साथ-साथ केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगना पड़ सकता है।