NEET पेपर लीक पर बड़ा एक्शन। फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान, वांगचुक ने तोड़ा अनशन, हाईकोर्ट भी सख्त
- जंतर-मंतर आंदोलन के बीच केंद्र के बड़े फैसले; दोषियों को त्वरित सजा, छात्रों पर कार्रवाई नहीं, पुलिस बल प्रयोग मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का ऐलान किया है।
दूसरी ओर, 26 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से सहमति बनने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया।
इसी बीच, संसद मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस बल प्रयोग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन सहित आवश्यक सभी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह निर्णय विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी त्वरित सुनवाई
फास्ट ट्रैक कोर्ट विशेष अदालतें होती हैं, जिनका गठन गंभीर और लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए किया जाता है।
इन अदालतों में सामान्य अदालतों की तुलना में सुनवाई तेज गति से होती है और लक्ष्य निर्धारित समय आमतौर पर छह महीने के भीतर फैसला देना होता है। अब पेपर लीक जैसे मामलों को भी इसी व्यवस्था के तहत प्राथमिकता से सुना जाएगा, जिससे लाखों छात्रों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा संभव हो सके।
26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर 28 जून से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह स्वयं जंतर-मंतर पहुंचे और वांगचुक को सूप पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंगमों भी मौजूद रहीं।
अनशन समाप्त करने से पहले वांगचुक ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों ने परीक्षाओं में सुधार तथा पेपर लीक के दोषियों की जवाबदेही तय करने पर संसद में चर्चा का भरोसा दिया है। उन्होंने छात्रों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील भी की।
सरकार ने मानीं प्रमुख मांगें
केंद्र सरकार ने वांगचुक की कई अहम मांगों को स्वीकार किया है। सरकार ने आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर और 20 जुलाई के “संसद मार्च” में शांतिपूर्ण ढंग से शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इसके अलावा संसद में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा कराने तथा पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी विचार करने की बात कही गई।
अनशन समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वांगचुक के स्वास्थ्य की कामना करते हुए उन्हें डॉक्टरों की सलाह का पालन करने और जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और पुलिस को भेजा नोटिस
उधर, 20 जुलाई को आयोजित “संसद चलो” मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस बल प्रयोग के आरोपों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया है ताकि सुनवाई के दौरान कोई महत्वपूर्ण प्रमाण नष्ट न हो।
याचिकाकर्ताओं के गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दावा किया गया कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों पर कील लगी लाठियों, पेलेट और इलेक्ट्रिक डंडों का इस्तेमाल किया गया, जिससे 90 से अधिक लोग घायल हुए। साथ ही यह भी कहा गया कि कई लोग बिना पुलिस वर्दी या पहचान पत्र के प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते दिखाई दिए।
याचिकाकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की है।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था, पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस ने बताया कि “संसद चलो” मार्च से जुड़े मामलों में अब तक नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान की हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर वह किसी भी वीडियो या आरोप की सत्यता पर टिप्पणी नहीं कर रहा है। अदालत ने केवल सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
इस तरह NEET पेपर लीक विवाद अब केवल जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकार, न्यायपालिका और छात्रों के व्यापक आंदोलन के केंद्र में आ चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा, सोनम वांगचुक के अनशन की समाप्ति और दिल्ली हाईकोर्ट की सक्रियता ने इस पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।


