बिग ब्रेकिंग: उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर फटकार

उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर फटकार

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन के मामले में सरकार के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए आदेशों पर अब तक सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जो अपने आप में अवमानना का विषय है।

कोर्ट ने मामले में अंतिम सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नियमावली में संशोधन करना होगा और इसके लिए कुछ अतिरिक्त समय दिया जाए।

इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार की ओर से हर बार कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगा जाता है, जबकि पूर्व के आदेशों का अभी तक पालन नहीं किया गया है।

वहीं, उपनल कर्मचारी संघ की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने के संबंध में उनसे बॉन्ड भरने का दबाव बनाया जा रहा है। संघ ने इसे गलत बताते हुए कोर्ट के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

2018 में हाईकोर्ट ने दिया था नियमितीकरण का आदेश

मामले के अनुसार, उपनल कर्मचारी संघ ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर कहा है कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

संघ के अनुसार, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी संविदा कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया। इसके बावजूद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर सरकार की ओर से पिछले करीब एक वर्ष से लगातार समय मांगा जा रहा है।

22 हजार कर्मचारियों पर टिकी निगाहें

उपनल कर्मचारी संघ का कहना है कि सरकार की ओर से न तो कोर्ट के आदेश का पूरी तरह अनुपालन किया जा रहा है और न ही कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।

इससे प्रदेश के करीब 22 हजार उपनल कर्मचारी असमंजस की स्थिति में हैं। अब हाईकोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। ऐसे में प्रदेशभर के उपनल कर्मचारियों की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी है।