राजनीति: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, कल सचिवालय घेराव का ऐलान

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, कल सचिवालय घेराव का ऐलान

देहरादून। चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़े फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए और दोनों चुनाव आयुक्तों की अंतिम फैसलों पर सहमति थी।

आयोग ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने कुछ पहलुओं पर सवाल जरूर उठाए थे, लेकिन इसे अंतिम निर्णयों पर असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और चुनाव आयोग पर हमला तेज कर दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची से जुड़े मामलों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 25 सितंबर को सचिवालय घेराव का ऐलान किया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर इस तरह के मतभेद सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश का हर व्यक्ति इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहा है।

उनके मुताबिक, जिस संस्था पर निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है, उसके भीतर ही दो चुनाव आयुक्तों की ओर से बार-बार आपत्ति दर्ज किया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले से ही मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रहे थे और अब चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों से उनके आरोपों को बल मिला है।

उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति दर्ज कराई और इसके बावजूद यदि संबंधित फैसले आगे बढ़ते रहे तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल फाइल पर आपत्ति दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। गोदियाल के मुताबिक, यदि किसी अधिकारी को किसी निर्णय पर आपत्ति थी और फिर भी वह निर्णय लागू हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही की जांच होनी चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और अब सीईसी को इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए।

विपक्षी दलों की ओर से सीईसी को हटाने की मांग राष्ट्रीय स्तर पर भी उठ रही है। 24 सितंबर को विपक्ष की ओर से संसद के दोनों सदनों में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी की खबर सामने आई है।

गोदियाल ने उत्तराखंड की 2022 विधानसभा चुनाव से जुड़ी भी गंभीर बातें कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भी कथित ‘वोट चोरी’ के आधार पर सरकार बनी।

हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें किसी न्यायिक या निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि जिन सरकारों के गठन को कांग्रेस कथित वोट चोरी से जोड़ रही है, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता है तो राष्ट्रपति को कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने/चुनाव आयोग में कार्रवाई की मांग दोहराई।

इस मुद्दे पर कांग्रेस के सचिवालय घेराव के चलते उत्तराखंड की राजनीति में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपने स्तर पर एसआईआर से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बता चुका है।