PTCUL निदेशक भर्ती नियमों पर हाईकोर्ट सख्त, ऊर्जा सचिव से मांगा जवाब
नैनीताल। पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) में निदेशक पद की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े संशोधित सेवा नियमों को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि भर्ती नियमों में बताई गई त्रुटि को सुधारने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है और इसे कब तक ठीक किया जाएगा।
साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक नियमों की खामी दूर नहीं हो जाती, तब तक निदेशक पद पर भर्ती के लिए कोई नया विज्ञापन जारी न किया जाए।
दरअसल, मामला अनुपम सिंह बनाम प्रमुख सचिव ऊर्जा विभाग एवं अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंका अग्रवाल ने अदालत को बताया कि संशोधित सेवा नियमों के तहत निदेशक पद के लिए वही व्यक्ति पात्र माना गया है, जिसने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चीफ इंजीनियर, जनरल मैनेजर या उससे उच्च पद पर कार्य किया हो।
याचिका में कहा गया कि पुराने नियमों में केवल चीफ इंजीनियर, जनरल मैनेजर या समकक्ष पद का अनुभव पर्याप्त था और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का सदस्य होना आवश्यक नहीं था। ऐसे में संशोधित नियम कई पात्र अधिकारियों को चयन प्रक्रिया से बाहर कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि पिटकुल में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के भीतर चीफ इंजीनियर या जनरल मैनेजर का कोई पद अस्तित्व में ही नहीं है। इस पर अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कोर्ट के समक्ष पूर्व में दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख किया गया, जिसमें राज्य सरकार ने स्वीकार किया था कि भर्ती नियमों में ‘अनजाने में त्रुटि’ रह गई है और उसे सुधारने की प्रक्रिया जारी है।
खंडपीठ ने अब ऊर्जा विभाग से विस्तृत जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 मई को निर्धारित की है।

