आफत की बारिश! चारधाम यात्रा पर अस्थायी रोक, 11 जिलों में स्कूल बंद, नदियां उफान पर, कई सड़कें ध्वस्त
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून अब विकराल रूप ले चुका है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक भूस्खलन, जलभराव, सड़क धंसने और नदियों के उफान ने हालात चिंताजनक बना दिए हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के विभिन्न जिलों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
सबसे गंभीर स्थिति को देखते हुए देहरादून, टिहरी और हरिद्वार में रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, उत्तरकाशी और पौड़ी में ऑरेंज तथा रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
खराब मौसम को देखते हुए प्रदेश के 11 जिलों में सोमवार को स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।
लगातार हो रही बारिश का सबसे बड़ा असर चारधाम यात्रा पर पड़ा है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन होने के बाद प्रशासन ने एहतियातन चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया।
गढ़वाल आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मार्गों पर फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाए और रास्ते पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही आगे भेजा जाए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। अब तक चारधाम और हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के बाद 44.84 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि रविवार को ही 9,018 श्रद्धालुओं ने धामों में दर्शन किए।
बारिश ने रुद्रप्रयाग जिले में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर हैं और बेलनी क्षेत्र में नदी किनारे स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न हो गई है।
सिरोबगड़ के पास बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन से यातायात कई घंटे बाधित रहा, जिसे बाद में मशीनों की मदद से बहाल किया गया। केदारनाथ हाईवे के बांसबाड़ा क्षेत्र में लगातार मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं, जिससे हर पल दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य आपदा प्रबंधन टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। फिलहाल केदारनाथ पैदल मार्ग पर पैदल यात्रियों का दोतरफा आवागमन शुरू कर दिया गया है, जबकि घोड़ा-खच्चरों के लिए एकतरफा व्यवस्था लागू की गई है।
राजधानी देहरादून भी बारिश से बेहाल है। शहर के कई इलाकों में जलभराव से सड़कें तालाब बन गईं और यातायात प्रभावित रहा। आईटी पार्क क्षेत्र सहित कई स्थानों पर लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ा।
संतला देवी मंदिर के पास अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से बीच टापू पर फंसे सात लोगों को एसडीआरएफ और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर सुरक्षित बाहर निकाला। डोईवाला विधानसभा के गडूल गांव में तेज बहाव के कारण ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थायी पुल बह गया, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया।
ग्रामीणों ने स्थायी पुल निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। कई मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है और लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
कुमाऊं मंडल में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। बागेश्वर के कपकोट ब्लॉक स्थित मौंधुरा गांव में भारी बारिश के चलते पहाड़ी का विशाल हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया। टनों मलबा और बड़ी चट्टानें गिरने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
नैनीताल जिले में लगातार बारिश के कारण आठ सड़कें बंद हो गई हैं। हल्द्वानी-भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामगढ़ पुल के पास सड़क धंसने से भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
हल्द्वानी की रामपुर रोड समेत कई सड़कों पर पाइपलाइन कार्य के बाद बने गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। मुक्तेश्वर, ओखलकांडा और श्यागखेत क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। जिले में स्नो व्यू, खनस्यू, कैंचीधाम, मुक्तेश्वर और काठगोदाम समेत कई क्षेत्रों में भारी वर्षा दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन सचिव और सभी जिलाधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी सड़क बंद, भूस्खलन, बिजली या पेयजल की समस्या हो, वहां तत्काल कार्रवाई कर व्यवस्था बहाल की जाए।
साथ ही चारधाम यात्रा मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें।
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक राहत मिलने की संभावना नहीं है। 21 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जबकि 22 और 23 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर समेत कई पर्वतीय जिलों में फिर से भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
प्रशासन ने साफ किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एहतियाती कदम भी उठाए जाएंगे। फिलहाल पूरे उत्तराखंड में प्रशासन हाई अलर्ट पर है और लोगों से सतर्कता बरतने की लगातार अपील की जा रही है।


