“दून की फिज़ा में बौर भी, बवाल भी- कहीं पोलन का कहर, कहीं मुक्कों का शहर”
देहरादून। राजधानी दून इन दिनों दो अलग-अलग घटनाओं को लेकर चर्चा में है। एक ओर क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के साथ मारपीट का मामला सुर्खियों में है, तो दूसरी ओर आम और लीची के पेड़ों पर आए बौर से लोगों को एलर्जी और सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एक तरफ शहर की सड़कों पर हाथापाई की गूंज है, तो दूसरी तरफ हवा में घुला पोलन लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है।
क्लेमेंटटाउन में इन्फ्लुएंसर से मारपीट, दो आरोपी गिरफ्तार
क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में 28 फरवरी की रात सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हिमांशु नेगी उर्फ हनी बॉय के साथ मारपीट का मामला सामने आया। बताया गया कि वह अपने दोस्तों के साथ एक कैफे के बाहर बैठे थे, तभी पांच युवकों ने मिलकर उनके साथ कथित रूप से मारपीट की। घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।
पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने साहिल, सक्षम और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपियों ने निजी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
आम-लीची के बौर से बढ़ी एलर्जी, दून अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी
उधर, बदलते मौसम और पेड़ों पर आए बौर ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों एलर्जी, सांस लेने में दिक्कत, छींक और गले में संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, आम और लीची के पेड़ों से निकलने वाले पोलन के कारण एलर्जी की समस्या सामने आ रही है। इसके साथ ही शुष्क मौसम और हवा में बढ़ती धूल भी लोगों की सेहत पर असर डाल रही है।
दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिससे नाक, कान, गले और छाती के संक्रमण के मामले भी बढ़े हैं।
डॉक्टरों ने विशेषकर सुबह के समय मास्क का उपयोग करने और पराग से एलर्जी वाले लोगों को पेड़ों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है।
दून की दो तस्वीरें
देहरादून इन दिनों दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर रहा है।
एक तस्वीर में कानून व्यवस्था की चुनौती है, जहां निजी विवाद सड़कों तक पहुंच रहे हैं। दूसरी तस्वीर में प्रकृति की ऋतु-परिवर्तन की कहानी है, जहां बौर की खुशबू के साथ एलर्जी की तकलीफ भी घुली हुई है।
शहर की फिज़ा में इस वक्त बस यही एहसास है-
“कहीं गुस्से की आग है, कहीं मौसम की मार;
दून संभलकर चल रहा है, हर मोड़ पर एक इम्तिहान तैयार है।”



