शिक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शिक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में राज्य सरकार और प्रशासन से जवाब तलब करते हुए सख्त रुख अपनाया है। एक ओर रुद्रपुर स्थित एक निजी स्कूल की मान्यता रद्द करने के आदेश को नियम विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी के मुखानी चौराहे पर वर्षों से लग रहे जाम और प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण मामले में सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
पहले मामले में उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने उधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर स्थित गुरुनानक डिग्री कॉलेज के समीप संचालित डिजिटल वर्ल्ड स्कूल की याचिका पर सुनवाई की।
याचिका में कहा गया कि जिला शिक्षाधिकारी ने स्कूल प्रबंधन का पक्ष सुने बिना अचानक मान्यता रद्द कर दी, जबकि स्कूल में वर्तमान में कक्षा एक से पांच तक करीब 390 छात्र अध्ययनरत हैं।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने स्कूल को मान्यता प्रदान की थी। छह मई को जिला शिक्षाधिकारी ने निरीक्षण कर स्कूल को मानकों के अनुरूप नहीं बताते हुए दो दिन में जवाब मांगा था।
समय पर जवाब न मिलने पर 12 मई को मान्यता रद्द करने का आदेश जारी कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि शैक्षणिक सत्र के बीच इस प्रकार की कार्रवाई से छात्रों और अभिभावकों में भारी परेशानी उत्पन्न हो गई है।
मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने जिला शिक्षाधिकारी के आदेश को नियम विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया और स्कूल प्रबंधन को दस दिन के भीतर नोटिस का जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
दूसरे मामले में मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने हल्द्वानी के मुखानी चौराहे को जाम मुक्त करने और फ्लाईओवर निर्माण संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई की।
न्यायालय ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए किए गए उपायों तथा फ्लाईओवर निर्माण के लिए कराए गए सर्वे की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने न्यायालय को बताया कि वर्ष 2018 में मुखानी चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण का सुझाव दिया गया था, जिसके बाद प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर सर्वे कराया, लेकिन कई वर्षों बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि मुखानी चौराहा शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है, जहां प्रतिदिन घंटों जाम लगा रहता है और आम लोगों, छात्रों तथा कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मामले में अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

