डॉल्फिन में 97 विद्यालयों का शैक्षिक मंथन, NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
देहरादून। डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के शिक्षा विभाग एवं NEP सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “गुरु संवाद 2026” में उत्तराखंड के 97 सरकारी, केंद्रीय और निजी विद्यालयों के शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत मंथन किया। कार्यक्रम में 93 शिक्षक और 22 प्रधानाचार्य शामिल हुए।
“NEP 2020 in Action: Bringing Policy and Practice in School” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केवल दस्तावेज तक सीमित न रखते हुए उसे कक्षा शिक्षण, पाठ्यचर्या, मूल्यांकन और कौशल विकास से जोड़ना था।
चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विद्यालयी शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों में रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता, नवाचार, व्यावसायिक कौशल और भविष्य के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित किया जाए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विद्यालयी शिक्षा विभाग के पूर्व अपर निदेशक कुलदीप गैरोला ने कहा कि कक्षा केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सोचने, प्रश्न करने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने का मंच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि NEP-2020 को वास्तविक रूप देने में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और इसके लिए रचनात्मकता तथा उच्च स्तरीय चिंतन कौशल विकसित करना आवश्यक है।
NCERT, नई दिल्ली के प्रो. गगन गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर NCERT के दृष्टिकोण को साझा करते हुए नीति, पाठ्यचर्या, शिक्षण पद्धति और मूल्यांकन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने अनुभवात्मक और दक्षता-आधारित अधिगम को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया।
डॉल्फिन संस्थान के चेयरमैन सीए अरविंद गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने शिक्षा को कौशल, व्यावसायिक शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक या कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच, व्यावहारिक समझ और भविष्य के लिए आवश्यक क्षमताओं का विकास करना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान की प्राचार्या प्रो. शैलजा पंत के स्वागत संबोधन से हुई, जबकि आयोजन सचिव डॉ. जी.एन. सिन्हा ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य प्रस्तुत किए।
इस दौरान आयोजित पैनल चर्चा में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और विशेषज्ञों ने कौशल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, विषय चयन और मूल्यांकन सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का सम्मान समारोह रहा। अतिथि वक्ताओं ने विद्यालयी शिक्षा में NEP-2020 के प्रभावी, सतत और विश्वसनीय क्रियान्वयन में योगदान देने वाले शिक्षकों एवं संस्थागत नेतृत्व को सम्मानित किया। आयोजकों ने इसे नीति को व्यवहारिक रूप देने वाले शिक्षकों के प्रति सार्वजनिक सम्मान बताया।
समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सफलता केवल नीति निर्माण से नहीं, बल्कि शिक्षक, विद्यालय नेतृत्व, विद्यार्थी, अभिभावक और उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सतत संवाद और सहयोग से सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम का संयोजन एवं क्यूरेशन डॉ. आशीष रतूड़ी ने किया, जबकि डॉ. हिमानी डंगवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


