‘प्लांट टू प्रोडक्ट’ मॉडल पर डॉल्फिन संस्थान की पहल, छात्रों को मिला हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण
देहरादून। डॉल्फिन (पी.जी.) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री एवं केमिस्ट्री विभाग ने रिसर्च एडवाइजरी कमेटी (RAC) के सहयोग से “Essential Oils: From Plant to Product” विषय पर एक दिवसीय वर्कशॉप एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को सुगंधित पौधों से मूल्यवर्धित एवं बाजार योग्य उत्पाद तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी देना था।
कार्यक्रम में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डाकपत्थर, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, डीबीयू यूनिवर्सिटी, डीबीएस पीजी कॉलेज और एमकेपी कॉलेज, देहरादून के करीब 30 विद्यार्थियों ने अपने संकाय सदस्यों के साथ भाग लिया।
डीन रिसर्च एवं RAC की संयोजक प्रो. (डॉ.) वर्षा परचा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल, स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय प्राकृतिक और सुगंधित संसाधनों के उपयोग के माध्यम से विद्यार्थियों, समुदायों और इच्छुक उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य संसाधन व्यक्ति एवं विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार ने कमर्शियल स्टीम डिस्टिलेशन यूनिट के माध्यम से आवश्यक तेलों के निष्कर्षण की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
प्रतिभागियों को लेमनग्रास, लैवेंडर और रोजमेरी जैसे सुगंधित पौधों से आवश्यक तेल निकालने की तकनीक सिखाई गई।
वहीं डॉ. रितु सिंह ने हर्बल सोप निर्माण पर हैंड्स-ऑन सत्र का संचालन किया और बताया कि आवश्यक तेलों का उपयोग विभिन्न हर्बल उत्पादों में किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
इसके अलावा डॉ. दीपक कुमार और डॉ. राजू चंद्रा ने प्रतिभागियों को आवश्यक तेलों से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान डिफ्यूजर, रोल-ऑन, रूम स्प्रे, परफ्यूम, एरोमैटिक कोन और फ्लोर क्लीनर जैसे उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
प्रो. (डॉ.) वर्षा परचा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अधिगम, व्यावहारिक प्रशिक्षण, उत्पाद नवाचार और उद्यमिता को एक मंच पर लाना था।
कार्यशाला ने प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक एवं तकनीकी कौशल को समाज तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में काम किया।
संस्थान ने भविष्य में इस प्रशिक्षण मॉडल को विद्यार्थियों, स्थानीय समुदायों, महिलाओं और नवोद्यमियों तक विस्तारित करने की योजना व्यक्त की है, ताकि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुगंधित पौधों से उपयोगी एवं बाजार योग्य उत्पाद विकसित कर स्वरोजगार और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके।


