हाईकोर्ट ब्रेकिंग: ज्योलिकोट जलकांड में जवाब तलब, किच्छा-सरौलीकलां मतगणना के आदेश

ज्योलिकोट जलकांड में जवाब तलब, किच्छा-सरौलीकलां मतगणना के आदेश

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को दो अहम मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए एक ओर ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से हुई तीन मौतों के मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।

वहीं दूसरी ओर किच्छा और सरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना कर परिणाम घोषित करने के लिए राज्य सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ज्योलिकोट पेयजल मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की निगरानी करने और व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। न्यायालय ने प्रशासन को दूषित जल स्रोतों की पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

हालांकि अधिकारियों ने स्थिति सामान्य होने और जल स्रोतों के नमूने संतोषजनक होने का दावा किया, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों में कई स्थानों के पेयजल नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।

तल्ला-मल्ला छिंडां, वीरभट्टी, बेलुआखान और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए नमूनों में घातक बैक्टीरिया मिलने की बात सामने आई।

अदालत ने ग्रामीणों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई न करने और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकेतों की अनदेखी करने पर अधिकारियों को फटकार लगाई।

साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से नए नमूने लेने और पूरे नैनीताल क्षेत्र में पेयजल की जांच कराने के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी प्रभावित परिवारों की स्थिति पर अलग शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया है।

उधर, किच्छा और सरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना रोकने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार के अनुरोध पर मतगणना पूरी कर परिणाम घोषित करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।

सरकार ने अदालत को बताया कि मतदान के दौरान कुछ बूथों पर तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई थी, इसलिए मतगणना कराने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

खंडपीठ ने सरकार की दलील स्वीकार करते हुए तीन सप्ताह के भीतर मतगणना कर परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया। इससे पहले अदालत मतगणना पर रोक संबंधी आदेश पर सवाल उठा चुकी थी और कहा था कि जब मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो मतगणना में अनावश्यक देरी क्यों की जा रही है।

मामला किच्छा निवासी अलीना मलिक और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया तथा चुनाव समय पर नहीं कराए गए।

याचिकाकर्ताओं ने किच्छा के साथ-साथ नवगठित सरौलीकलां नगर पालिका में भी चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की थी।

दोनों मामलों में हाईकोर्ट के ताजा निर्देशों ने प्रशासन और राज्य सरकार की जवाबदेही बढ़ा दी है। अब एक ओर ज्योलिकोट में बीमारी फैलने के वास्तविक कारणों का खुलासा और जिम्मेदारी तय होने पर निगाहें टिकी हैं।

वहीं दूसरी ओर किच्छा और सरौलीकलां नगर पालिका चुनाव के परिणाम घोषित होने का रास्ता भी साफ होता दिखाई दे रहा है।