कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम में नई तैनाती, ‘गद्दू मियां’ विवाद ने बढ़ाई सियासी गर्मी
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। कांग्रेस ने चुनावी रणनीति को धार देने के साथ-साथ सोशल मीडिया मोर्चे पर भी अपनी टीम को मजबूत करना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया विभाग में नई नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया जनता तक राजनीतिक मुद्दे पहुंचाने और भाजपा-कांग्रेस के बीच नरेटिव वॉर का अहम मैदान बनने वाला है।
उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से नई नियुक्तियों की जानकारी साझा की। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया विभाग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अभिनव थापर को दी गई है।
वहीं भारत शर्मा और हर्षित सिंह बिष्ट को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा मधुसूदन सुंदरीयाळ, रोहित भट्ट, दिनेश चंद्र टम्टा और जसवीर कौर को समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस की नई सोशल मीडिया टीम से पार्टी को उम्मीद है कि वह संगठन की नीतियों, सरकार से जुड़े मुद्दों और जनसरोकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए व्यापक स्तर तक पहुंचाएगी।
पार्टी की रणनीति में सोशल मीडिया को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी राजनीति में फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म अब सिर्फ प्रचार के माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि राजनीतिक धारणा बनाने और मुद्दों को जनता के बीच ले जाने के प्रमुख हथियार बन चुके हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि नई टीम कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग को और मजबूत करेगी तथा जनसरोकारों की आवाज को प्रभावी और व्यापक तरीके से जनता तक पहुंचाएगी।
कांग्रेस की कोशिश साफ तौर पर संगठन के डिजिटल नेटवर्क को सक्रिय करने की दिखाई दे रही है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने मुद्दों को आक्रामक ढंग से जनता के बीच रख सके।
चुनावी मैदान से सोशल मीडिया तक बढ़ेगी टक्कर
उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जाता है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच राजनीतिक नरेटिव को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस की नई सोशल मीडिया टीम की नियुक्तियों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी जहां सरकार की नीतियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर सवाल उठाएगी, वहीं भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसी बीच भाजपा नेता दीप्ति रावत भारद्वाज के बयानों को लेकर भी सियासी माहौल गरमाया हुआ है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारियों और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा एक अनुशासित राजनीतिक पार्टी है और पार्टी जिस कार्यकर्ता को जो जिम्मेदारी देती है, सभी कार्यकर्ता उसके साथ मिलकर चुनाव में जाते हैं।
दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि वह छात्र राजनीति के समय से ही सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और पार्टी की रीति-नीति के अनुसार लगातार काम करती रही हैं। उन्होंने अपने पूर्व राजनीतिक चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया और कहा कि जिन क्षेत्रों में उन्होंने चुनाव लड़ा था, वहां आज भाजपा के विधायक और मंत्री हैं।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा भी उठा
दीप्ति रावत भारद्वाज ने कांग्रेस पर महिलाओं के सम्मान को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कांग्रेस से जुड़े लोग उनके खिलाफ जिस तरह की भाषा और अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे महिलाओं के सम्मान के प्रति कांग्रेस की सोच का पता चलता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड में सोशल मीडिया के जरिए राजनीतिक बहस लगातार तीखी होती जा रही है। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और समर्थक अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीधे एक-दूसरे के खिलाफ अभियान चलाते नजर आते हैं।
ऐसे में आने वाले समय में व्यक्तिगत आरोपों के साथ-साथ नीतियों, विकास, रोजगार, महिला सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर भी डिजिटल बहस तेज हो सकती है।
‘गद्दू मियां’ विवाद ने बढ़ाई सियासी गर्मी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ‘गद्दू मियां’ शब्द से शुरू हुआ विवाद भी अब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन चुका है। शुरुआती तकरार अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप, धार्मिक आस्था और संभावित विधानसभा चुनावी दावेदारी तक पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों पक्षों की ओर से आए बयानों के बाद मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तराखंड की राजनीति में चुनावी तैयारी का यह शुरुआती दौर है, लेकिन नेताओं के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि 2027 का विधानसभा चुनाव केवल परंपरागत जनसभाओं और रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा। सोशल मीडिया पर नरेटिव बनाने और उसे जनता तक पहुंचाने की लड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
कांग्रेस ने नई सोशल मीडिया टीम के जरिए अपना डिजिटल मोर्चा मजबूत करने की शुरुआत कर दी है। अब देखना होगा कि भाजपा इसके जवाब में अपनी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है।
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, राजनीतिक मुद्दों के साथ सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप, वीडियो वार, बयान और काउंटर नैरेटिव भी उत्तराखंड की चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।


