खास खबर: जेल में नम हुईं बहनों की आंखें, वंशी नारायण के खुले कपाट! रक्षाबंधन पर दिखी आस्था और अपनत्व

जेल में नम हुईं बहनों की आंखें, वंशी नारायण के खुले कपाट! रक्षाबंधन पर दिखी आस्था और अपनत्व

देहरादून। रक्षाबंधन का पर्व उत्तराखंड में इस बार सिर्फ भाई-बहन के प्रेम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आस्था, संवेदना, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की कई तस्वीरें देखने को मिलीं।

कहीं जेल की सलाखों के पीछे बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं बहनों की आंखें नम थीं, तो कहीं रामनगर में समाजसेवी ने मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला से राखी बंधवाकर इंसानियत और अपनत्व का संदेश दिया।

चमोली के प्रसिद्ध वंशी नारायण मंदिर के कपाट भी साल में सिर्फ एक दिन रक्षाबंधन पर श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में प्रदेश के पहले राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय का भूमि-पूजन और शिलान्यास किया।

इस बीच प्रदेशभर में मुख्यमंत्री, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष समेत कई नेताओं ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

जेल में भाइयों की कलाई पर राखी, बहनों की आंखों से छलके आंसू

हल्द्वानी जेल में रक्षाबंधन के अवसर पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। बड़ी संख्या में बहनें जेल में बंद अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं।

जिन भाइयों के साथ हर साल घर में रक्षाबंधन मनाया जाता था, इस बार वे जेल की सलाखों के पीछे थे। बहनों ने जेल पहुंचकर भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके सुखद भविष्य तथा लंबी उम्र की कामना की।

राखी बांधते समय कई बहनों की आंखें नम हो गईं। किसी ने भाई के जल्द घर लौटने की प्रार्थना की तो किसी ने उम्मीद जताई कि अगली राखी पूरा परिवार एक साथ घर पर मनाएगा।

परिजनों का कहना था कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, भाई-बहन का रिश्ता भावनाओं से जुड़ा होता है और बहन के लिए भाई का महत्व हमेशा कायम रहता है।

रामनगर में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला ने समाजसेवी को बांधी राखी

रामनगर में रक्षाबंधन पर एक अलग और दिल को छू लेने वाला दृश्य सामने आया। आमडंडा, लखनपुर और आसपास के क्षेत्रों में अक्सर नजर आने वाली मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को समाजसेवी मुकेश सुयाल ने सम्मान और अपनत्व दिया। रक्षाबंधन के दिन महिला ने मुकेश सुयाल को पहचान लिया और उनकी कलाई पर राखी बांधी।

इस भावुक पल ने आसपास मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। न कोई खून का रिश्ता था और न कोई औपचारिक संबंध, लेकिन भाई-बहन के इस रिश्ते में अपनापन साफ नजर आया।

मुकेश सुयाल ने कहा कि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति उसके सम्मान और इंसानी अधिकारों को कम नहीं करती। समाज को ऐसे लोगों को दुत्कारने के बजाय संवेदनशीलता और सम्मान के साथ अपनाना चाहिए।

यह घटना रक्षाबंधन के मूल संदेश को भी सामने लाती है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और इंसानियत से भी बनते हैं।

रक्षाबंधन पर खुला वंशी नारायण मंदिर का कपाट

चमोली जिले की उर्गम घाटी में समुद्रतल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध वंशी नारायण मंदिर के कपाट रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। साल में केवल एक दिन खुलने वाले इस मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी।

उर्गम घाटी से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में भगवान नारायण की चतुर्भुज प्रतिमा विराजमान है। रक्षाबंधन के दिन यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कलगोठ गांव के ग्रामीण दूध और मक्खन लेकर मंदिर पहुंचते हैं।

भगवान को मक्खन का भोग लगाया जाता है और दूध से अभिषेक की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है और भगवान नारायण को रक्षासूत्र अर्पित किया जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार देवर्षि नारद वर्षभर भगवान नारायण की पूजा करते हैं और रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलता है। मंदिर से भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। यही वजह है कि यहां रक्षाबंधन के दिन दर्शन को बेहद विशेष माना जाता है।

देवीधुरा की बग्वाल में आस्था और परंपरा का अनूठा संगम

रक्षाबंधन के अवसर पर चंपावत के देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल भी आस्था और लोकपरंपरा के बीच आयोजित हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां बाराही के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की घोषणा की और करीब 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग बनाए जाने की बात कही।

बग्वाल में फल-फूल और पत्थरों की बरसात कुछ देर के लिए रणभूमि जैसा दृश्य जरूर पैदा करती है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी धार्मिक आस्था और सामाजिक परंपरा जुड़ी है।

आयोजन में करीब 180 लोगों के घायल होने और चार घायलों को जिला चिकित्सालय रेफर किए जाने के बावजूद श्रद्धालुओं और बग्वालियों के उत्साह में कमी नहीं दिखी। बग्वाल के बाद एक-दूसरे को गले लगाते लोगों ने यह संदेश दिया कि यह परंपरा आपसी दुश्मनी नहीं, बल्कि आस्था, सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है।

हल्द्वानी को खेल विश्वविद्यालय की सौगात

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर उत्तराखंड को प्रदेश के पहले राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय की सौगात मिली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के गौलापार में उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के भूमि-पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

खेल विश्वविद्यालय के शुरू होने से प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय के लिए कुलपति समेत 94 पदों को भी स्वीकृति मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री ने इसके बाद हल्द्वानी में व्यापार एवं उद्योग जगत से जुड़े लोगों के साथ संवाद किया और शहर में आयोजित अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।

धामी, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष ने दी शुभकामनाएं

रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास, स्नेह और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन नारी सम्मान और सामाजिक सद्भाव की भावना को भी मजबूत करता है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मातृशक्ति को सशक्त किए बिना समृद्ध उत्तराखंड की कल्पना पूरी नहीं हो सकती।

मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर 28 और 29 अगस्त को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को निशुल्क यात्रा की सुविधा देने की बात भी कही। चंपावत दौरे से लौटने के बाद हल्द्वानी में सैकड़ों स्थानीय महिलाओं ने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने भी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए इसे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, स्नेह और विश्वास का प्रतीक बताया।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने के साथ समाज में प्रेम, भाईचारे और सौहार्द की भावना को बढ़ाता है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

दिल्ली में PM मोदी ने स्कूली छात्राओं से बंधवाई राखी

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। वार्षिक परंपरा के तहत स्कूली छात्राओं ने 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचकर उनकी कलाई पर राखी बांधी। प्रधानमंत्री ने बच्चों से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी साझा कीं।

एक बच्चे के यह पूछने पर कि बचपन में उनका सपना क्या था, प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि उनका सपना बच्चों से मिलना था। प्रधानमंत्री ने कामना की कि रक्षाबंधन सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लेकर आए और स्नेह तथा आपसी विश्वास की डोर हमेशा मजबूत बनी रहे।

पश्चिम बंगाल की हैंडलूम राखी बनी आकर्षण

रक्षाबंधन पर पश्चिम बंगाल के शांतिपुर की हैंडलूम राखियां भी चर्चा में रहीं। राष्ट्रपति से सम्मानित हैंडलूम कारीगर अभिनव बसाक ने सूती कपड़े से विशेष राखियां तैयार की हैं। उनके परिवार का हैंडलूम क्षेत्र में लंबा योगदान रहा है। उनके पिता बिरेन बसाक को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अभिनव बसाक ने इस वर्ष दो डिजाइन और दो आकारों में करीब 65 राखियां तैयार की हैं। उनका कहना है कि वह पारंपरिक राखी से अलग कुछ बनाने के उद्देश्य से कॉटन फैब्रिक पर राखियां तैयार करने की ओर बढ़े। इन राखियों को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत कई प्रमुख लोगों तक भेजने का प्रयास किया गया है।

इस तरह रक्षाबंधन ने इस बार उत्तराखंड से लेकर दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक रिश्तों की भावुकता, धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक संवेदनशीलता और आधुनिक पहल को एक साथ जोड़ दिया।

जेल की सलाखों के पीछे भाई की कलाई पर बंधी राखी हो या रामनगर में बिना किसी खून के रिश्ते के बनी भाई-बहन की डोर हर तस्वीर ने यही संदेश दिया कि रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, बल्कि विश्वास, अपनापन, सम्मान और इंसानियत का प्रतीक है।