बिग ब्रेकिंग: हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच। परिवार को ₹25 लाख मुआवजा

हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच। परिवार को ₹25 लाख मुआवजा

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय श्रवण की हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने मौत के बाद दो साल से अधिक समय तक FIR दर्ज नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि न्याय के हित में मामले की जांच CBI को सौंपना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हिरासत में हिंसा के लिए जो अधिकारी जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

18 जनवरी को हिरासत, तीन दिन बाद अस्पताल में मौत

मामले के मुताबिक, श्रवण को 18 जनवरी 2024 को कथित तौर पर ₹1,200 की शराब रखने के मामले में हिरासत में लिया गया था। इसके तीन दिन बाद 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

जुलाई 2024 में हुई न्यायिक जांच में सामने आया था कि हिरासत के दौरान ब्लंट हथियार से सिर में लगी चोट उसकी मौत की वजह बनी। इसके बावजूद मामले में FIR काफी देर बाद, कथित तौर पर 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने में हुई इस देरी को गंभीरता से लिया और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंप दी।

परिवार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा

अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को श्रवण के परिवार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने माना कि श्रवण परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और हिरासत के दौरान हुई हिंसा के कारण उसकी अप्राकृतिक मौत हुई।

13 अक्टूबर तक CBI को देनी होगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को मामले की जांच तेजी से पूरी कर 13 अक्टूबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के DGP को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर CBI निदेशक को सौंपने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी अधिकारी की भूमिका हिरासत में हिंसा या मौत के लिए सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए।