विशेष खबर: उत्तराखंड की तिजोरी का गणित! 67 हजार करोड़ की आय, 41 हजार करोड़ वेतन-पेंशन-ब्याज में खर्च

उत्तराखंड की तिजोरी का गणित! 67 हजार करोड़ की आय, 41 हजार करोड़ वेतन-पेंशन-ब्याज में खर्च

देहरादून। उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति को केवल राज्य पर चढ़े कर्ज के आंकड़े से समझना पूरी तस्वीर नहीं बताता। राज्य पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये का कर्ज जरूर है, लेकिन वास्तविक खातों में कर्ज और देनदारियों का अनुपात पिछले कुछ वर्षों में घटा है।

2024-25 के वास्तविक खातों के मुताबिक, राज्य की कुल ऋण एवं देनदारियां सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 23.96 प्रतिशत पर रही हैं। वहीं 2026-27 के बजट में सरकार ने 2,536 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया है।

हालांकि, दूसरी तरफ राज्य का राजकोषीय घाटा 15,989 करोड़ रुपये यानी GSDP का 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

ऐसे में उत्तराखंड की वित्तीय सेहत के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्ज को नियंत्रित रखने के साथ-साथ अपनी आय बढ़ाना, केंद्र से मिलने वाले संसाधनों पर संतुलित निर्भरता बनाए रखना और वेतन-पेंशन-ब्याज जैसे प्रतिबद्ध खर्चों के बीच विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन जुटाना है।

राजस्व का 53 प्रतिशत केंद्र से मिलने का अनुमान

2026-27 के बजट के अनुसार उत्तराखंड को कुल 67,526 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियां होने का अनुमान है। इसमें राज्य अपने कर और गैर-कर स्रोतों से करीब 31,620 करोड़ रुपये जुटाएगा, जबकि केंद्र से करों में हिस्सेदारी और अनुदान के रूप में करीब 35,906 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।

यानी राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों में करीब **47 प्रतिशत हिस्सा राज्य के अपने संसाधनों** से आएगा, जबकि **53 प्रतिशत हिस्सा केंद्र से मिलने वाले संसाधनों** का होगा।

केंद्र से मिलने वाली राशि में 17,415 करोड़ रुपये केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और 18,491 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में मिलने का अनुमान है। यह स्थिति बताती है कि उत्तराखंड की वित्तीय मजबूती के लिए अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाना कितना महत्वपूर्ण है।

GST बना राज्य की कमाई का सबसे बड़ा कर स्रोत

2026-27 में उत्तराखंड का अपना कर राजस्व करीब 25,913 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसमें वस्तु एवं सेवा कर यानी SGST सबसे बड़ा स्रोत है।

बजट अनुमान के मुताबिक राज्य को SGST से करीब **12,200 करोड़ रुपये**, आबकारी से **5,384 करोड़ रुपये**, स्टांप एवं पंजीकरण से **3,092 करोड़ रुपये**, VAT/बिक्री कर से **2,652 करोड़ रुपये** और मोटर वाहन कर से **1,703 करोड़ रुपये** मिलने का अनुमान है।

इसके अलावा राज्य का अपना गैर-कर राजस्व 2026-27 में करीब **5,707 करोड़ रुपये** रहने का अनुमान है। 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह 5,198 करोड़ रुपये था।

पर्यटन और जलविद्युत उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, लेकिन इन दोनों से होने वाले व्यापक आर्थिक लाभ को सीधे सरकारी राजस्व के बराबर मानना सही नहीं होगा।

पर्यटन से रोजगार, होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलता है, जबकि सरकार को मिलने वाला राजस्व अलग-अलग कर और शुल्क मदों में दर्ज होता है। इसी तरह जलविद्युत से रॉयल्टी, लाभांश और अन्य गैर-कर प्राप्तियां अलग-अलग मदों में आती हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र पर बड़ा खर्च

2026-27 में राज्य का राजस्व खर्च करीब **64,989 करोड़ रुपये** प्रस्तावित है। वहीं पूंजीगत परिव्यय यानी नई परिसंपत्तियों के निर्माण और मौजूदा आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर **18,153 करोड़ रुपये** खर्च करने का प्रावधान किया गया है।

पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में पूंजीगत व्यय में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है। सरकार ने कृषि, परिवहन और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में भी पूंजीगत निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है।

प्रमुख क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित बजट में शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति के लिए करीब **13,201 करोड़ रुपये**, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए **6,078 करोड़ रुपये**, ग्रामीण विकास के लिए **5,533 करोड़ रुपये**, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए **4,916 करोड़ रुपये** और सामाजिक कल्याण एवं पोषण के लिए **4,556 करोड़ रुपये** का प्रावधान है।

वहीं सड़कों और पुलों के लिए करीब **2,106 करोड़ रुपये** का पूंजीगत परिव्यय प्रस्तावित है।

वेतन-पेंशन और ब्याज में ही जाएंगे 41 हजार करोड़

उत्तराखंड के बजट पर प्रतिबद्ध खर्च का दबाव भी काफी अधिक है। वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज जैसे खर्चों को कम करना सरकार के लिए आसान नहीं होता।

2026-27 के बजट अनुमान में वेतन के लिए करीब **22,105 करोड़ रुपये**, पेंशन के लिए **11,137 करोड़ रुपये** और ब्याज भुगतान के लिए **7,929 करोड़ रुपये** का प्रावधान है।

इन तीनों को मिलाकर करीब **41,172 करोड़ रुपये** होते हैं। यह राज्य की अनुमानित कुल राजस्व प्राप्तियों 67,526 करोड़ रुपये का करीब **61 प्रतिशत** है।

यानी राजस्व का बड़ा हिस्सा पहले से तय खर्च में चला जाता है। ऐसे में नई योजनाओं, विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचे के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना रहता है।

कर्ज का अनुपात लगातार हुआ कम

कर्ज के मोर्चे पर उत्तराखंड को पिछले कुछ वर्षों में राहत जरूर मिली है। CAG के 2024-25 के वास्तविक खातों के मुताबिक, मार्च 2025 के अंत में राज्य का सार्वजनिक ऋण **73,026 करोड़ रुपये** था। वहीं सार्वजनिक खाता देनदारियां **17,631 करोड़ रुपये** थीं।

दोनों को मिलाकर कुल देनदारियां **90,657 करोड़ रुपये** रहीं, जो राज्य के GSDP का **23.96 प्रतिशत** थीं।

कुल देनदारियों और GSDP के अनुपात पर नजर डालें तो 2020-21 में यह **31.66 प्रतिशत** था। इसके बाद 2021-22 में 28 प्रतिशत, 2022-23 में 24.89 प्रतिशत, 2023-24 में 24.10 प्रतिशत और 2024-25 में 23.96 प्रतिशत रहा।

इससे स्पष्ट है कि कोरोना महामारी के दौर के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में देनदारियों का अनुपात नीचे आया है।

हालांकि, कर्ज के आंकड़ों को लेकर एक तकनीकी अंतर भी है। CAG के फाइनेंस अकाउंट में 31 मार्च 2025 को व्यापक अर्थ में बकाया देनदारियां 94,666.04 करोड़ रुपये दर्ज हैं, जबकि ऋण-GSDP अनुपात के लिए Accounts at a Glance में 90,657 करोड़ रुपये का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक समान मानना उचित नहीं होगा।

राजस्व अधिशेष राहत, लेकिन राजकोषीय घाटा चिंता

2026-27 के बजट में सरकार ने **2,536 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष** अनुमानित किया है। यह GSDP का करीब 0.6 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि सरकार की नियमित राजस्व आय उसके नियमित राजस्व खर्च से अधिक रहने का अनुमान है।

यह वित्तीय अनुशासन के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि रोजमर्रा के सरकारी खर्च को पूरा करने के लिए राजस्व खाते में लगातार उधारी पर निर्भरता नहीं दिखाई देती।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू राजकोषीय घाटा है। 2026-27 में यह **15,989 करोड़ रुपये यानी GSDP का 3.7 प्रतिशत** अनुमानित है। 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह 3.4 प्रतिशत था।

इसका अर्थ है कि पूंजीगत खर्च और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार की कुल आय और कुल खर्च के बीच अंतर बना हुआ है, जिसे उधारी के जरिए पूरा करना पड़ रहा है।

पर्यटन और जलविद्युत की भूमिका सिर्फ सरकारी आय तक सीमित नहीं

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन और जलविद्युत की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन इनका मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि सरकारी खजाने में सीधे कितनी रकम आती है।

पर्यटन का असर होटल, रेस्तरां, परिवहन, स्थानीय व्यापार, रोजगार और सेवा क्षेत्र पर पड़ता है। इसी तरह जलविद्युत क्षेत्र से रॉयल्टी, लाभांश और अन्य गैर-कर आय होती है। इसलिए इन क्षेत्रों के वास्तविक आर्थिक योगदान को सरकारी कर राजस्व से अलग करके देखना जरूरी है।

आगे की चुनौती क्या?

उत्तराखंड के आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल राज्य ने अपने कर्ज और देनदारियों के अनुपात को नियंत्रित किया है। राजस्व खाते में अधिशेष का अनुमान है और सरकार पूंजीगत निवेश बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

लेकिन दूसरी ओर कुल राजस्व प्राप्तियों का आधे से अधिक हिस्सा केंद्र से मिलने की उम्मीद है। राज्य के अपने संसाधनों में वृद्धि की गुंजाइश बनी हुई है, जबकि वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे प्रतिबद्ध खर्च राजस्व का बड़ा हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ ही राजकोषीय घाटा भी बढ़ा है।

इसलिए उत्तराखंड के लिए चुनौती सिर्फ **कर्ज कम रखने** की नहीं है। राज्य को अपनी **कर संग्रह क्षमता बढ़ानी होगी, अपने राजस्व स्रोत मजबूत करने होंगे, केंद्र पर निर्भरता का संतुलन बनाना होगा और प्रतिबद्ध खर्च को नियंत्रित रखते हुए पूंजीगत निवेश बढ़ाना होगा।**

यही संतुलन आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की वित्तीय सेहत की असली कसौटी साबित होगा।