गजब: पुराने वार्ड मालामाल, नए वार्ड बेहाल! सफाई कर्मियों के बंटवारे पर नगर निगम में उठे सवाल, दिया अल्टीमेटम

पुराने वार्ड मालामाल, नए वार्ड बेहाल! सफाई कर्मियों के बंटवारे पर नगर निगम में उठे सवाल, दिया अल्टीमेटम

  • बोर्ड में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के बावजूद नहीं हुआ अमल, विस्तारित वार्डों में कर्मचारियों की कमी का आरोप; वार्ड 60 के मुद्दे भी उठाए

देहरादून। नगर निगम देहरादून के सभी वार्डों में सफाई कर्मचारियों और पर्यावरण मित्रों के समान एवं न्यायसंगत वितरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के बावजूद अब तक इसका अनुपालन नहीं होने पर पार्षदों ने नाराजगी जताई है।

पार्षदों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय लागू नहीं किया गया तो जनहित और बोर्ड की गरिमा की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

इस संबंध में नगर निगम प्रशासन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सफाई कर्मियों के असमान वितरण के कारण कई वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पूर्व में भी इस संबंध में 9 फरवरी और 6 अप्रैल 2026 को पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया गया था।

बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से हुआ था फैसला

पत्र के मुताबिक नगर निगम बोर्ड बैठक में सफाई कर्मियों के असमान वितरण पर विस्तृत चर्चा हुई थी। बैठक में सभी वार्डों में पर्यावरण मित्रों की संख्या समान रूप से आवंटित किए जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था।

बैठक में महापौर ने सभी वार्डों में बराबर संख्या में पर्यावरण मित्र उपलब्ध कराने की बात कही थी। वहीं नगर आयुक्त ने प्रत्येक वार्ड में समान संख्या में कर्मचारियों के आवंटन की जिम्मेदारी मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना को सौंपी थी।

पार्षद रोबिन त्यागी ने पुरुष और महिला सफाई कर्मियों का समान रूप से आवंटन किए जाने की मांग उठाई थी। वहीं पार्षद सुमित पुंडीर ने कहा था कि जनसंख्या के आधार पर वार्डों का परिसीमन किया गया है, इसलिए सभी वार्डों में बराबर संख्या में सफाई कर्मचारी दिए जाने चाहिए।

VIP कार्यक्रमों से भी प्रभावित होती है सफाई व्यवस्था

बैठक में पार्षद रोहन चंदेल ने बताया था कि उनके वार्ड में समय-समय पर वीआईपी कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इन कार्यक्रमों के लिए वार्ड के सफाई कर्मचारियों को अन्य स्थानों पर लगा दिया जाता है, जिससे संबंधित वार्ड की सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है।

उन्होंने ऐसे मामलों में अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने की मांग की थी। पार्षद विमल उनियाल ने पूर्व की तरह नगर निगम स्तर से पर्यावरण मित्र रखे जाने की बात कही थी।

पुराने और नए वार्डों में कर्मचारियों के वितरण पर सवाल
मुख्यमंत्री को भेजे गए अलग पत्र में नगर निगम देहरादून के पुराने और नए वार्डों में सफाई कर्मचारियों की संख्या में असमानता का मुद्दा भी उठाया गया है।

पत्र में दावा किया गया है कि नगर निगम के पुराने शहरी वार्डों में पहले से नियमित एवं स्थायी सफाई कर्मचारी कार्यरत होने के बावजूद अतिरिक्त स्वच्छता समितियां उपलब्ध कराई गईं।

इसके चलते कुछ वार्डों में 30 से 40 तक कर्मचारी होने, जबकि नए विस्तारित ग्रामीण वार्डों में केवल 10 से 12 कर्मचारी उपलब्ध होने का दावा किया गया है।

पत्र में कहा गया है कि नए जुड़े वार्ड क्षेत्रफल की दृष्टि से काफी विस्तृत हैं और वहां सीमित कर्मचारियों के माध्यम से प्रभावी सफाई व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

नई भर्ती से पहले समान वितरण की मांग

पार्षदों की ओर से कहा गया है कि नगर निगम में यदि नए सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रस्तावित है तो उससे पहले वर्तमान में उपलब्ध कर्मचारियों का सभी वार्डों में समान एवं न्यायसंगत वितरण किया जाए।

इसके बाद होने वाली नई भर्ती में भी कर्मचारियों का आवंटन वार्ड की जनसंख्या और क्षेत्रफल को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी तरीके से किया जाए।

साथ ही, नई भर्ती पूरी होने तक अंतरिम व्यवस्था के तहत सभी 100 वार्डों में समान संख्या में सफाई कर्मचारी तैनात करने की मांग की गई है।

वार्ड 60 के मुद्दे भी बोर्ड में उठाने की मांग

वार्ड 60 से संबंधित एक अन्य पत्र में सफाई कर्मचारियों की कमी के साथ कई अन्य जनहित के मुद्दे भी आगामी बोर्ड बैठक में उठाने की मांग की गई है।

पत्र में वार्ड 60 स्थित अंबेडकर पार्क की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए उसके पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण की मांग की गई है। साथ ही पार्क की सुरक्षा और रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग भी की गई है।

इसके अलावा धोधीघाट क्षेत्र का नाम बदलकर “दुधाचार्य एन्क्लेव” किए जाने और इसी नाम से कॉलोनी गेट का निर्माण कराने का अनुरोध किया गया है।

भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग

पत्र में श्रेणी 6(1) की जलमग्न/विशेष श्रेणी की भूमि से जुड़े मामलों का मुद्दा भी उठाया गया है। जनहित के सार्वजनिक कार्यों के लिए ऐसी भूमि के संबंध में संस्तुति देने में आने वाली बाधाओं और अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की गई है।

पार्षदों ने भूमि के उपयोग और आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता, समानता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है।

फैसला लागू नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

पार्षदों का कहना है कि बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। यदि जल्द ही सभी वार्डों में सफाई कर्मियों का समान एवं न्यायसंगत आवंटन नहीं किया गया तो बोर्ड बैठक में निर्णय का समर्थन करने वाले पार्षद लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं कि वह बोर्ड के सर्वसम्मत निर्णय को कब तक लागू करता है और विस्तारित वार्डों में सफाई कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।