करोड़ों का शुल्क, लाखों की बैंक गारंटी और विवादित नक्शे! टिहरी प्राधिकरण में घालमेल
रिपोर्ट- सलमान मलिक
टिहरी। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, टिहरी में तैनात सहायक अभियंता दिग्विजय नाथ तिवारी के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं।
प्राधिकरण के सहायक अभियंता पंकज पाठक की ओर से उपाध्यक्ष और उच्च अधिकारियों को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में नियमों के विपरीत नक्शे स्वीकृत किए गए, जरूरी शुल्क की वसूली नहीं हुई और प्राधिकरण को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा। शिकायत के अनुसार, संबंधित अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में तैनात हैं।
आरोप है कि विभागीय स्तर पर आपत्तियां और शिकायतें सामने आने के बावजूद अब तक उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
पार्क और खुले स्थल की भूमि पर नक्शा पास करने का आरोप
फाइल संख्या TSN/CR/0002/24-25 को लेकर शिकायत में कहा गया है कि जिस भूमि के प्रस्ताव को पहले कृषि भूमि के आधार पर निरस्त किया गया था, बाद में उसे मास्टर प्लान से बाहर दर्शाकर स्वीकृति दे दी गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित भूमि वास्तव में पार्क और खुले स्थल के उपयोग में दर्ज थी। इस मामले में भूमि उपयोग और नक्शे की स्वीकृति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
₹1.46 करोड़ शुल्क की वसूली न होने का आरोप
फाइल संख्या TSN/NC/0004/24-25/RE1 में चंबा क्षेत्र के मनोज कुमार गुप्ता से संबंधित मामले का उल्लेख किया गया है। शिकायत के मुताबिक 2,000 वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड के संबंध में करीब ₹1.46 करोड़ का भू-उच्चीकरण शुल्क वसूला जाना था।
आरोप है कि मास्टर प्लान से संबंधित प्रावधानों को नजरअंदाज करते हुए यह शुल्क नहीं लिया गया, जिससे प्राधिकरण को राजस्व नुकसान हुआ।
₹72 लाख की बैंक गारंटी के बिना नक्शा रिलीज करने का आरोप
फाइल संख्या TSN/L/0001/24-25, कमल कांत मलिक से संबंधित मामले में शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि ले-आउट नियमावली के तहत करीब ₹72 लाख की बैंक गारंटी लिया जाना आवश्यक था, लेकिन बैंक गारंटी जमा कराए बिना ही नक्शा रिलीज कर दिया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला वित्तीय और प्रक्रियात्मक दोनों स्तरों पर गंभीर माना जा सकता है।
कौड़ियाला मामले में ₹2.18 करोड़ के शुल्क पर सवाल
फाइल संख्या TSN/NC/0014/23-24 में ग्राम कौड़ियाला से संबंधित मामले का उल्लेख है। शिकायत के अनुसार नगर निकाय क्षेत्र से बाहर 2,000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि के मामले में नियमों के तहत करीब ₹2.18 करोड़ का शुल्क देय था। आरोप है कि आवश्यक शुल्क की वसूली किए बिना ही स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
मुनि की रेती में होटल के नक्शे को लेकर भी शिकायत
शिकायत में मुनि की रेती क्षेत्र में प्रस्तावित 5/7 स्टार होटल के नक्शे पर भी सवाल उठाए गए हैं।
आरोप है कि संबंधित भूमि का भू-उपयोग गलत तरीके से दर्शाकर नक्शा स्वीकृत किया गया, जबकि मुख्य नगर नियोजक (CTP) के रिकॉर्ड में उक्त स्थल को पार्क एवं खुले स्थल के रूप में दर्ज किया गया था। इस मामले में भी रिकॉर्ड और स्वीकृति प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
सील इमारतों में निर्माण जारी रहने का आरोप
शिकायतकर्ता ने नरेंद्रनगर तहसील क्षेत्र में कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कई मामलों में सीलिंग की कार्रवाई नहीं की गई और कुछ ऐसी इमारतों में भी निर्माण गतिविधियां जारी रहीं, जिन्हें पहले सील किया जा चुका था।
इंजीनियर ने लगाया धमकी और प्रताड़ना का आरोप
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता अभियंता ने आरोप लगाया है कि विभागीय बैठक में अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
साथ ही झूठी शिकायतें दर्ज कराकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान और हतोत्साहित करने का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच के बाद ही साफ होगी आरोपों की सच्चाई
शिकायत में सचिव, आवास विभाग, उत्तराखंड शासन और जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित फाइलों और स्वीकृत नक्शों की जांच तथा दोष पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित फाइलों में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, प्राधिकरण को कितना वास्तविक वित्तीय नुकसान हुआ और नक्शों की स्वीकृति में किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है। अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।


