बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल, पांच मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य बदले

उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल, पांच मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य बदले

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए छह वरिष्ठ चिकित्सकों के तबादले और प्रभार परिवर्तन के आदेश जारी किए हैं।

इस फेरबदल के तहत राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नए प्राचार्यों की नियुक्ति की गई है, जबकि चिकित्सा शिक्षा निदेशक का दायित्व भी बदला गया है। शासन ने सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।

जारी आदेश के अनुसार डॉ. आशुतोष सयाना को राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर के प्राचार्य पद से हटाकर निदेशक, चिकित्सा शिक्षा नियुक्त किया गया है। वहीं डॉ. अजय कुमार आर्य को निदेशक चिकित्सा शिक्षा के दायित्व से मुक्त करते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी का प्राचार्य बनाया गया है।

इसी क्रम में डॉ. चन्द्रप्रकाश भैंसौड़ा को राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा से स्थानांतरित कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर का प्राचार्य नियुक्त किया गया है। डॉ. चन्द्र मोहन सिंह रावत को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार से स्थानांतरित कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर का प्राचार्य बनाया गया है।

वहीं डॉ. जी.एस. तितियाल को हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज से राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा का प्राचार्य नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा डॉ. पंकज सिंह, जो हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार का प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है।

तबादलों की सूची

  • डॉ. आशुतोष सयाना → प्राचार्य, जीएमसी श्रीनगर से निदेशक, चिकित्सा शिक्षा
  • डॉ. अजय कुमार आर्य → निदेशक, चिकित्सा शिक्षा से प्राचार्य, जीएमसी हल्द्वानी
  • डॉ. चन्द्रप्रकाश भैंसौड़ा → जीएमसी अल्मोड़ा से प्राचार्य, जीएमसी रुद्रपुर
  • डॉ. चन्द्र मोहन सिंह रावत → जीएमसी हरिद्वार से प्राचार्य, जीएमसी श्रीनगर
  • डॉ. जी.एस. तितियाल → जीएमसी हल्द्वानी से प्राचार्य, जीएमसी अल्मोड़ा
  • डॉ. पंकज सिंह → प्रोफेसर, जीएमसी हल्द्वानी से प्रभारी प्राचार्य, जीएमसी हरिद्वार

सरकार का कहना है कि इस प्रशासनिक फेरबदल का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और मेडिकल कॉलेजों में बेहतर शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।