राजनीति: हरदा की हुंकार से कांग्रेस में हलचल, सैलजा की चिट्ठी के बीच 30% सीटों का संकट

हरदा की हुंकार से कांग्रेस में हलचल, सैलजा की चिट्ठी के बीच 30% सीटों का संकट

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस में अंदरूनी सियासत खुलकर सामने आती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी के भीतर पैदा हुआ विवाद अब संगठन और वरिष्ठ नेतृत्व के बीच टकराव की चर्चा को हवा दे रहा है।

कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की आपत्ति और पत्र के बावजूद हरीश रावत ने यात्रा जारी रखकर साफ संकेत दे दिया है कि वह अपने जनसंपर्क अभियान को फिलहाल रोकने के मूड में नहीं हैं।

हरीश रावत ने सोमवार को जसपुर, काशीपुर, रामनगर, कालाढूंगी और हल्द्वानी तक के कार्यक्रमों का विस्तृत शेड्यूल सार्वजनिक किया। सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्वाभिमान और बदलाव के संकल्प के लिए अब रुकना नहीं है।

उनके इस संदेश को कांग्रेस नेतृत्व की नाराजगी के बावजूद राजनीतिक सक्रियता जारी रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने हरीश रावत को पत्र लिखकर कहा कि यात्रा और कार्यक्रमों को लेकर न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से चर्चा की गई।

उन्होंने चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता पर जोर देते हुए ऐसे समानांतर कार्यक्रमों को पार्टी हित में नहीं बताया और इन्हें आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया।

हालांकि, हरीश रावत ने न केवल यात्रा जारी रखी बल्कि अपने समर्थकों को भी जनसंवाद अभियान से जुड़े रहने का संदेश दिया।

ईडी की कार्रवाई और अपने करीबी सहयोगी चंदन सिंह जीना से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे राजनीतिक चुनौती बताया और कहा कि वह जनता के बीच रहकर संघर्ष जारी रखेंगे।

इस बीच हरीश रावत को उनकी बेटी और हरिद्वार ग्रामीण से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत का भी खुला समर्थन मिला है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के साथ उनकी तस्वीर सामने आने के बाद पार्टी के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पूरे विवाद पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे विषयों पर पार्टी मंच पर चर्चा होगी और आपसी मंथन के बाद निर्णय लिया जाएगा। उनका कहना है कि हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनसे विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर लगातार संवाद हो रहा है।

दरअसल, हरीश रावत की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है जब कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। स्वास्थ्य लाभ के बाद प्रदेश लौटे रावत लगातार रोड शो, जनसंवाद और विभिन्न जिलों के दौरों के जरिए कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय नजर आ रहे हैं।

इससे पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वह संगठन की आधिकारिक गतिविधियों के समानांतर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस की चिंता केवल अंदरूनी खींचतान तक सीमित नहीं है। पार्टी के सामने चुनावी गणित की चुनौती भी खड़ी है।

2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कई सीटों पर बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था और कई क्षेत्रों में मजबूत उम्मीदवारों की कमी भी महसूस की जा रही है। ऐसे में चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी जरूरत मानी जा रही है।

फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व खुली टकराव की स्थिति से बचते हुए संवाद और समन्वय का रास्ता तलाशता दिख रहा है, लेकिन हरीश रावत की बढ़ती सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में नेतृत्व, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर बहस अभी और तेज हो सकती है।