दुःखद: उत्तराखंड कांग्रेस को बड़ा झटका। पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का निधन

उत्तराखंड कांग्रेस को बड़ा झटका। पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का निधन

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और इंटक (INTUC) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट का आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति, कांग्रेस संगठन और श्रमिक आंदोलन में शोक की लहर दौड़ गई है।

लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे बिष्ट ने देर रात सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद परिजन उन्हें ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड की राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने अपना पूरा राजनीतिक जीवन श्रमिकों, कर्मचारियों, गरीबों और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया।

वे अपनी सादगी, मिलनसार स्वभाव और जनसरोकारों के प्रति समर्पण के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाते थे।
एन.डी. तिवारी सरकार में उन्होंने परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

राज्य गठन से पहले उत्तर प्रदेश और उसके बाद उत्तराखंड की राजनीति में उन्होंने कांग्रेस संगठन की मजबूती और श्रमिक हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। लंबे समय तक इंटक के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने मजदूरों की आवाज बुलंद की।

उनके निधन की सूचना मिलते ही सेवक आश्रम रोड स्थित उनके आवास पर कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया। उनके करीबी हिमांशु के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार नालापानी श्मशान घाट में किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं इंटक के प्रदेश अध्यक्ष रहे हीरा सिंह बिष्ट का निधन अत्यंत पीड़ादायक है।

उन्होंने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट हमेशा गरीबों, मजदूरों, कर्मचारियों और वंचित वर्ग की आवाज बनकर खड़े रहे। उनका निधन न केवल कांग्रेस परिवार बल्कि उत्तराखंड की राजनीति और श्रमिक आंदोलन के लिए भी अपूरणीय क्षति है।

हीरा सिंह बिष्ट का निधन उत्तराखंड कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक और वैचारिक क्षति माना जा रहा है। जनसेवा, सामाजिक सरोकार और श्रमिक अधिकारों के लिए उनका संघर्ष लंबे समय तक याद किया जाएगा।